सैंडविच की दुनिया हमें एक मजेदार बात सिखाती है, कभी-कभी सबसे साधारण चीजें ही सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो जाती हैं। न इसमें कोई बड़ी तैयारी चाहिए, न कोई खास अवसर। बस थोड़ी-सी पसंद, थोड़ा-सा स्वाद और खाने का मन होना चाहिए। आज विश्व सैंडविच दिवस पर आप भी अपनी पसंद का सैंडविच खाइए, परिवार और दोस्तों के साथ कुछ हंसी-मजाक कीजिए और जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों का आनंद लीजिए।
क्योंकि जिंदगी में परेशानियां तो कभी खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनके बीच मुस्कुराने का मौका हमें खुद तलाशना पड़ता है। और अगर आज कोई आपसे कहे कि वह दो लोगों के बीच सैंडविच बन गया है, तो उसे सांत्वना देने के बजाय एक सैंडविच खिलाइए। क्या पता, उसका मूड ही बदल जाए!
कभी सुबह की जल्दी में नाश्ते का सहारा, कभी बच्चों के स्कूल टिफिन का सबसे भरोसेमंद साथी, कभी ऑफिस की मीटिंग के बीच भूख मिटाने का आसान उपाय और कभी दोस्तों के साथ चाय की चुस्कियों का मजेदार संग-साथ… सैंडविच हमारी जिंदगी में कई रूपों में मौजूद है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए न कोई बड़ी रसोई चाहिए और न ही लंबी-चौड़ी तैयारी। दो ब्रेड के टुकड़े लीजिए, उनके बीच अपनी पसंद की चीजें रखिए और तैयार हो गया आपका मनपसंद नाश्ता! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस साधारण-से दिखने वाले व्यंजन का नाम सैंडविच कैसे पड़ा? क्या इसके पीछे ताश खेलने के शौकीन एक अंग्रेज रईस की कहानी छिपी है? और क्या सैंडविच केवल दो ब्रेड के बीच रखी खाने की चीजों का नाम है या दुनिया के अलग-अलग देशों ने इसे अपनी संस्कृति और स्वाद के हिसाब से अलग-अलग पहचान भी दी है?
दिलचस्प बात यह है कि सैंडविच केवल खाने की प्लेट तक सीमित नहीं रहा। हमारी बोलचाल में भी यह जगह बना चुका है। कभी कोई दो लोगों के बीच फंसकर सैंडविच बन जाता है, तो कभी परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच दबा इंसान खुद को सैंडविच महसूस करता है! तो आइए, आज स्वाद की इस मजेदार दुनिया में चलते हैं। अपनी भूख को थोड़ा इंतजार कराइए और सैंडविच की ऐसी बातें जानिए, जिन्हें पढ़कर शायद आपका मन भी कह उठे, आज तो सैंडविच खाना ही पड़ेगा!
आखिर सैंडविच का नाम सैंडविच कैसे पड़ा?
सैंडविच की कहानी जितनी स्वादिष्ट है, उतनी ही दिलचस्प भी।।इसका नाम इंग्लैंड के एक प्रसिद्ध रईस जॉन मोंटेग्यू (John Montagu) से जुड़ा है, जो चौथे अर्ल ऑफ सैंडविच थे। उनका जन्म 1718 में हुआ था। उनके बारे में एक मशहूर किस्सा प्रचलित है। कहा जाता है कि उन्हें ताश खेलने का बहुत शौक था। एक बार वे लंबे समय तक ताश के खेल में व्यस्त थे। खेल छोड़कर भोजन करने जाना उन्हें मंजूर नहीं था। इसलिए उन्होंने अपने सेवक से कहा कि मांस का एक टुकड़ा ब्रेड के दो टुकड़ों के बीच रखकर ले आएं, ताकि वे खेलते-खेलते ही खाना खा सकें और उनके हाथ भी ज्यादा गंदे न हों।
उनके साथी खिलाड़ियों को यह तरीका पसंद आया। वे भी कहने लगे कि उन्हें वही भोजन चाहिए जो सैंडविच खा रहे हैं। धीरे-धीरे इस तरह के भोजन को ही सैंडविच कहा जाने लगा। हालांकि इतिहासकारों के बीच इस कहानी के कुछ विवरणों को लेकर मतभेद हैं और ब्रेड के बीच भरावन रखकर खाने की परंपरा उनसे बहुत पुरानी थी। लेकिन आधुनिक अंग्रेजी नाम को लोकप्रिय बनाने का श्रेय जॉन मोंटेग्यू को ही दिया जाता है। यानी जिस सुविधा के लिए एक व्यक्ति ने खेल के बीच खाना मंगवाया था, उसी ने दुनिया को एक लोकप्रिय खाद्य नाम दे दिया। अब यह मत पूछिए कि उस दिन ताश का खेल कौन जीता था, क्योंकि इतिहास ने खिलाड़ी से ज्यादा उसके नाश्ते को याद रखा!
दो ब्रेड के बीच पूरी दुनिया!
सैंडविच की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी आजादी। इसमें क्या भरना है, यह पूरी तरह आपकी पसंद पर निर्भर करता है।किसी को आलू पसंद है, किसी को टमाटर और खीरा, किसी को पनीर तो किसी को चीज। कोई इसे सादा खाना पसंद करता है तो कोई इसे ग्रिल करके कुरकुरा बनाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सैंडविच ने अपने स्थानीय स्वाद के अनुसार कई रूप ले लिए हैं।
क्लब सैंडविच: इसमें ब्रेड की तीन परतों के बीच सब्जियां, चीज और अन्य सामग्री रखी जाती है।
ग्रिल्ड सैंडविच: इसे गर्म प्लेट या ग्रिल पर सेंककर कुरकुरा बनाया जाता है।
सबमरीन सैंडविच: लंबी ब्रेड के भीतर कई तरह की सामग्री भरकर बनाया जाता है।
ओपन सैंडविच: इसमें ब्रेड का केवल एक टुकड़ा होता है और उसके ऊपर खाने की सामग्री सजाई जाती है।
पीनट बटर एंड जेली सैंडविच: अमेरिका में लोकप्रिय इस सैंडविच में मूंगफली से बना मक्खन और फल से बनी जैम या जेली लगाई जाती है।
कुछ सैंडविच इतने बड़े होते हैं कि उन्हें देखकर लगता है कि बनाने वाले ने भूख मिटाने के बजाय किसी खाने की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला कर लिया है!
विदेशी सैंडविच का देसी अवतार!
भारत में सैंडविच का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। यहां आते ही इस विदेशी व्यंजन ने देसी रंग अपना लिया।मुंबई का वड़ा पाव और पाव भाजी भले ही पारंपरिक सैंडविच की श्रेणी में न आते हों, लेकिन ब्रेड और भरावन के मेल ने भारतीय खानपान में अपनी अलग जगह बनाई है। भारतीय सैंडविच की दुनिया में आलू, हरी चटनी, टमाटर, प्याज, खीरा, पनीर, मसाले और चीज का खूब इस्तेमाल होता है। मुंबई का स्ट्रीट फूड सैंडविच हो या घर में बनने वाला आलू सैंडविच, हर जगह स्वाद का अपना अंदाज है। कहीं हरी चटनी का तीखापन है तो कहीं मक्खन और चीज की भरपूर परत। और भारतीय रसोई की खासियत देखिए! जिस चीज को विदेश में सलाद और चीज के साथ खाया जाता है, भारत में उसी में आलू मसाला, चटनी, चाट मसाला और हरी मिर्च डालकर ऐसा रूप दे दिया जाता है कि विदेशी सैंडविच भी सोचता होगा, भाई, मेरा असली परिचय तो अब हुआ है!
सैंडविच और हमारी रोजमर्रा की जिंदगी!
सैंडविच की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है कि यह हर परिस्थिति में काम आ जाता है। सुबह देर हो रही हो तो सैंडविच, बच्चों को टिफिन देना हो तो सैंडविच, अचानक मेहमान आ जाएं तो सैंडविच और घर में सब्जी बनाने का मन न हो तो भी सैंडविच! इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी से भेदभाव नहीं करता। अमीर के घर में चीज और पनीर वाला सैंडविच मिलता है, तो आम आदमी के घर में आलू और चटनी वाला। किसी होटल में इसकी कीमत सैकड़ों रुपये हो सकती है, तो सड़क किनारे ठेले पर यही सैंडविच कम कीमत में मिल जाता है। कई बार तो सैंडविच की हालत भी इंसान जैसी हो जाती है। ऊपर से देखने पर सब कुछ ठीक दिखाई देता है, लेकिन अंदर क्या भरा है, यह खाने के बाद ही पता चलता है! और कुछ लोग तो इतने व्यस्त होते हैं कि सैंडविच खाते समय भी मोबाइल पर नजरें टिकाए रहते हैं। ऐसे में अगर सैंडविच बोल सकता तो शायद कहता, भाई, कम से कम मुझे खाते समय तो देख लो, मैं भी आपकी जिंदगी का हिस्सा हूं!
जब इंसान भी बन जाता है सैंडविच!
सैंडविच शब्द का इस्तेमाल अब केवल खाने तक सीमित नहीं है। हमारी बोलचाल में भी यह खूब प्रचलित है। जरा इन परिस्थितियों पर गौर कीजिए। एक कर्मचारी को बॉस कहता है कि काम जल्दी पूरा करो। घर से फोन आता है कि समय पर घर पहुंचना। बच्चे कहते हैं कि आज हमारे साथ घूमने चलिए। अब बेचारा कर्मचारी करे तो क्या करे? वह नौकरी और परिवार के बीच ऐसा फंसा है जैसे दो ब्रेड के बीच आलू! इसी तरह दो दोस्तों के बीच किसी विवाद में फंस गया तीसरा व्यक्ति भी सैंडविच बन जाता है। पति-पत्नी के बीच फंसा हो, दो अधिकारियों के बीच कर्मचारी हो या ट्रेन या बस में सफर कर रहा कोई व्यक्ति या फ़िर दो पक्षों की नाराजगी झेल रहा कोई रिश्तेदार, हर जगह सैंडविच बनने की पूरी संभावना रहती है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि दुनिया में सैंडविच खाने वालों से ज्यादा सैंडविच बनने वाले लोग हैं! फर्क बस इतना है कि खाने वाला सैंडविच खत्म होते ही प्लेट से गायब हो जाता है, जबकि इंसान वाला सैंडविच अपनी परेशानी लेकर कई दिनों तक घूमता रहता है।
क्या सैंडविच की भी कोई सीमा है?
यह सवाल बड़ा दिलचस्प है कि आखिर किस चीज को सैंडविच कहा जा सकता है? दो ब्रेड के बीच आलू रख दिया तो सैंडविच, पनीर रख दिया तो सैंडविच, चीज रख दिया तो भी सैंडविच। लेकिन अगर ब्रेड के बीच समोसा रख दिया तो क्या होगा? कुछ लोग कहेंगे समोसा सैंडविच, कुछ कहेंगे यह तो समोसे का अपमान है और कुछ ऐसे भी होंगे जो कहेंगे कि नाम चाहे जो रख लो, खाने में मजा आना चाहिए! इसी तरह बर्गर को भी लेकर बहस होती रहती है। उसके बीच में भी तो भरावन है और ऊपर-नीचे ब्रेड जैसी बन होती है। लेकिन बर्गर की अपनी अलग पहचान है। सच तो यह है कि खाने की दुनिया में कई व्यंजन एक-दूसरे के इतने करीब हैं कि उनके बीच रिश्तेदारी निकालना मुश्किल नहीं। मगर स्वाद के मामले में हर किसी की अपनी पसंद है।और वैसे भी, भोजन की दुनिया में बहस करने से पेट नहीं भरता। उसके लिए खाना पड़ता है!
सैंडविच के कुछ मजेदार सवाल और उनके जवाब!
सवाल : सैंडविच बनाने के लिए कितने लोगों की जरूरत होती है?
जवाब : एक व्यक्ति काफी है। लेकिन खाने के समय परिवार के सभी सदस्य अपने आप पहुंच जाते हैं!
सवाल : सैंडविच इतना लोकप्रिय क्यों है?
जवाब : क्योंकि यह कम समय में तैयार होता है और भूख लगने पर ज्यादा सवाल नहीं पूछता।
सवाल : क्या सैंडविच शाकाहारी भी हो सकता है?
जवाब : बिल्कुल! आलू, खीरा, टमाटर, पनीर, चटनी और कई तरह की सब्जियों से स्वादिष्ट शाकाहारी सैंडविच बनता है।
सवाल : अगर सैंडविच के बीच कुछ भी न रखा जाए तो?
जवाब : फिर वह सैंडविच नहीं, दो ब्रेड के बीच खालीपन होगा। हालांकि कुछ लोगों की जिंदगी में भी ऐसा खालीपन होता है, लेकिन वह अलग विषय है!
सवाल : सैंडविच खाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
जवाब : जब भूख लगी हो और सामने सैंडविच मौजूद हो। बाकी समय का निर्णय आपकी रसोई और जेब पर निर्भर करता है!
दुनिया के सैंडविच और उनके अलग-अलग अंदाज
दुनिया के अलग-अलग देशों में सैंडविच की अपनी पहचान है। कहीं यह साधारण नाश्ता है तो कहीं स्थानीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा।
इटली का पानिनी: ब्रेड में चीज, सब्जियां और अन्य सामग्री भरकर गर्म किया जाता है।
वियतनाम का बान मी: फ्रेंच ब्रेड में स्थानीय स्वाद और कई तरह की भरावन का शानदार मेल।
अमेरिका का पास्ट्रामी सैंडविच: मांस की विशेष तैयारी और ब्रेड के साथ लोकप्रिय व्यंजन।
फ्रांस का क्रोक मस्यूर: चीज और अन्य सामग्री से तैयार गर्म सैंडविच।
इन व्यंजनों को देखकर समझ आता है कि दो ब्रेड के बीच रखी जाने वाली चीजें भले ही अलग हों, लेकिन भूख और स्वाद की भाषा पूरी दुनिया में एक जैसी है।
सैंडविच से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जो आपको चौंका सकते हैं!
* सैंडविच का नाम इंग्लैंड के एक स्थान सैंडविच (Sandwich) के नाम पर रखी गई उपाधि से आया है। यह स्थान इंग्लैंड के केंट क्षेत्र में है।
* सैंडविच का विचार जॉन मोंटेग्यू से भी पुराना है। प्राचीन सभ्यताओं में भी ब्रेड या रोटी के साथ दूसरी खाद्य सामग्री खाने की परंपरा थी।
* दुनिया में सैंडविच की इतनी किस्में हैं कि हर दिन एक नया सैंडविच खाया जाए तो भी लंबे समय तक नए स्वाद आजमाने का अवसर मिलता रहेगा।
* सैंडविच का एक बड़ा आकर्षण इसकी आसानी से साथ ले जाने की सुविधा है। इसे पिकनिक, यात्रा, स्कूल और ऑफिस में आसानी से ले जाया जा सकता है।
* अमेरिका में डैगवुड सैंडविच नाम का एक मशहूर नाम कार्टून चरित्र डैगवुड बमस्टेड से जुड़ा है। यह इतना ऊंचा और परतदार दिखाया जाता है कि उसे देखकर लगता है कि खाने से पहले किसी इंजीनियर की मदद लेनी पड़ेगी!
सैंडविच दिवस : स्वाद के साथ मुस्कुराने का बहाना
विश्व सैंडविच दिवस हमें किसी गंभीर संदेश या बड़े संकल्प के लिए नहीं बुलाता। यह उन छोटे-छोटे आनंद के पलों की याद दिलाने का एक अच्छा अवसर है, जिन्हें हम अक्सर व्यस्त जिंदगी में भूल जाते हैं। कभी परिवार के साथ बैठकर कुछ खाने का आनंद लेना, कभी दोस्तों के साथ चाय और सैंडविच का मजा लेना या कभी खुद अपनी पसंद का सैंडविच बनाकर खाना, ये छोटी-छोटी बातें भी दिन को खुशनुमा बना सकती हैं। और हां, सैंडविच खाते समय यह जरूर याद रखिए कि दो ब्रेड के बीच चाहे कितनी भी चीजें रख दी जाएं, स्वाद का असली राज उनके सही मेल में ही है। वैसे यह बात जीवन पर भी लागू होती है। लेकिन आज जीवन-दर्शन की ज्यादा बातें नहीं करेंगे, क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि सैंडविच दिवस पर भी हम आपको उपदेशों के बीच सैंडविच बना दें! ह 😀ह 😀 ह 😀…
कभी -कभी जिंदगी को बहुत गंभीरता से लेने के बजाय थोड़ा हल्के में भी लीजिए। आखिर मुस्कुराने के लिए हमेशा किसी बड़े कारण की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी एक अच्छा सैंडविच भी काफी होता है!
(डिस्क्लेमर :- विश्व सैंडविच दिवस हर वर्ष 3 नवंबर को जॉन मोंटेग्यू, चौथे अर्ल ऑफ सैंडविच के जन्मदिवस (3 नवंबर 1718) के संदर्भ में लोकप्रिय रूप से मनाया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस नहीं है। सैंडविच की उत्पत्ति से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी के कुछ हिस्से प्रचलित किंवदंतियों पर आधारित हैं, इसलिए उन्हें प्रमाणित इतिहास के बजाय लोकप्रिय मान्यता के रूप में समझना उचित है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी और मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसे किसी और संदर्भ में न देखा जाए।)


