भिलाई। 04 जुलाई, 2026, (सीजी संदेश) : शहर की आकाशगंगा थोक सब्जी मंडी के व्यापारियों ने एक बार फिर मंडी के शीघ्र स्थानांतरण की मांग तेज कर दी है। मंडी अध्यक्ष रवि सिंह के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त राजीव पांडे से मुलाकात कर आकाशगंगा स्थित वर्तमान मंडी को राधिका नगर में जल्द से जल्द स्थानांतरित करने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में वर्तमान मंडी की स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है, जिससे व्यापारियों, किसानों, वाहन चालकों और ग्राहकों सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।व्यापारियों ने बताया कि अप्रैल माह में मंडी संघ के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम से मुलाकात कर राधिका नगर में थोक सब्जी मंडी स्थानांतरित करने की मांग रखी थी। इसके बाद जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं नगर निगम आयुक्त राजीव पांडे ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने शीघ्र स्थानांतरण का प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेजने का आश्वासन दिया था। व्यापारियों का आरोप है कि लगभग चार माह बीत जाने के बावजूद अब तक स्थानांतरण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे मंडी के सैकड़ों व्यापारी और उनसे जुड़े किसान निराश और आक्रोशित हैं।
बारिश में बदतर हो जाती है मंडी की स्थिति
मंडी व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान परिसर वर्षों से क्षमता से अधिक भार झेल रहा है। बरसात शुरू होते ही मंडी परिसर और आसपास के क्षेत्र में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। जगह-जगह कीचड़ और गंदा पानी जमा हो जाता है, जिससे सब्जियों के परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और खरीद-बिक्री का कार्य प्रभावित होता है। व्यापारियों के अनुसार कई बार पानी सब्जियों तक पहुंच जाता है, जिससे माल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, वहीं किसानों की उपज का उचित मूल्य भी प्रभावित होता है।
पार्किंग और यातायात सबसे बड़ी चुनौती
आकाशगंगा क्षेत्र शहर के व्यस्त इलाकों में शामिल है। यहां प्रतिदिन 300 से ज्यादा संख्या में ट्रक, पिकअप, मिनी ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन सब्जियां लेकर पहुंचते हैं। पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान सड़कें संकरी और फिसलन भरी हो जाने से स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे माल उतारने और भेजने में घंटों का समय लग जाता है।
किसानों और ग्राहकों पर भी पड़ रहा असर
व्यापारियों का कहना है कि थोक मंडी केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका से भी जुड़ी हुई है। यदि मंडी में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होंगी तो इसका सीधा असर किसानों, फुटकर व्यापारियों और अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बरसात में कीचड़, जलभराव और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई होती है। वहीं ग्राहकों और छोटे व्यापारियों को भी मंडी तक पहुंचने और खरीदारी करने में परेशानी उठानी पड़ती है।
राधिका नगर को बताया बेहतर विकल्प
मंडी संघ का कहना है कि राधिका नगर में प्रस्तावित स्थल अधिक विस्तृत है, जहां भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ व्यवस्थित थोक सब्जी मंडी विकसित की जा सकती है। यहां पर्याप्त पार्किंग, बड़े मालवाहक वाहनों के आवागमन की सुविधा, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था तथा व्यवस्थित व्यापारिक परिसर विकसित होने से किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों सभी को लाभ मिलेगा। व्यापारियों का मानना है कि यदि मंडी का स्थानांतरण शीघ्र किया जाता है तो शहर के यातायात का दबाव भी कम होगा और थोक व्यापार अधिक व्यवस्थित एवं सुगम तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
निगम आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
मंडी अध्यक्ष रवि सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूर्व में किए गए आश्वासन के अनुरूप स्थानांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और प्रस्ताव को शीघ्र अंतिम रूप देकर राज्य शासन से स्वीकृति प्राप्त की जाए। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही स्थानांतरण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर थोक सब्जी मंडी को बंद कर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
व्यापारियों का कहना है कि यह मांग किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि शहर की सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था, किसानों की सुविधा, व्यापार की निरंतरता और आम नागरिकों की परेशानी को दूर करने के उद्देश्य से की जा रही है। ऐसे में शासन और प्रशासन को इस विषय को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।




