भिलाई। 14 जून, 2026, (सीजी संदेश) : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भिलाई जिला अध्यक्ष राजू गुप्ता ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मदर टेरेसा नगर वार्ड क्रमांक 31 स्थित दस बिस्तर अस्पताल के पास कचरे के ढेर में भोजन तलाशते मवेशियों की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में गाय, बैल, बछड़े एवं अन्य बेसहारा पशु कचरे के बीच अपना पेट भरने को मजबूर हैं, जो नगर की स्वच्छता व्यवस्था और पशु संरक्षण के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
राजू गुप्ता ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि कचरे में फैली पॉलिथीन और प्लास्टिक सामग्री अब पशुओं के लिए मौत का कारण बनती जा रही है। प्लास्टिक पर प्रतिबंध होने के बावजूद शहर की सड़कों और बाजारों में प्रतिबंधित पॉलिथीन का उपयोग खुलेआम जारी है। लोगों में जागरूकता की कमी और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के अभाव का खामियाजा अब मूक पशुओं को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि शहर को भले ही आवारा पशु मुक्त घोषित करने के दावे किए जाते हों, लेकिन वास्तविकता यह है कि हर गली, सड़क और कचरे के ढेर के आसपास बेसहारा पशु भोजन की तलाश में भटकते दिखाई देते हैं। भोजन के साथ वे अनजाने में पॉलिथीन, प्लास्टिक और अन्य हानिकारक वस्तुएं भी निगल जाते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। राजू गुप्ता ने पशु चिकित्सकों के हवाले से कहा कि कई मामलों में गायों के पेट के ऑपरेशन के दौरान कई किलो पॉलिथीन, लोहे की कीलें और कांच के टुकड़े निकाले गए हैं। यह स्थिति न केवल पशुओं के प्रति क्रूरता को दर्शाती है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
उन्होंने कहा कि एक ओर समाज गाय को “गौ माता” कहकर सम्मान देता है, वहीं दूसरी ओर वही पशु कचरे के ढेरों में भोजन खोजने और असमय मौत का शिकार होने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। धार्मिक आस्था और व्यवहारिक जिम्मेदारी के बीच का यह विरोधाभास चिंताजनक है। त्योहारों और आयोजनों में पशुओं के प्रति भावनात्मक लगाव दिखाया जाता है, लेकिन उनकी सुरक्षा, भोजन और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर प्रयास दिखाई नहीं देते। शिवसेना नेता ने नगर निगम एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की कि क्षेत्र में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग पर प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा बेसहारा पशुओं के संरक्षण और उचित देखभाल के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे कचरा खुले में न फेंकें और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि मूक पशुओं को कचरे और प्लास्टिक के भरोसे जीवन जीने के लिए मजबूर न होने दिया जाए।




