दुर्ग 24 जुलाई 2026 / “वाद से समाधान, मध्यस्थता से सम्मान और सौहार्द से सशक्त समाज का निर्माण” के मूल उद्देश्य को साकार करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी “Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India” स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा 25 जुलाई 2026 से 29 जुलाई 2026 तक पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में किया जा रहा है। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 25 जुलाई 2026 को प्रातः 08:45 बजे आयोजित होने वाले भव्य उद्घाटन समारोह के साथ किया जाएगा।
कम्यूनिटी मीडियेशन अर्थात् सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण भारत में सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनहितकारी पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालयों तक पहुँचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा “वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” के निर्माण के संकल्प के साथ जिले के पांच ग्राम घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है, जहाँ कम्यूनिटी मीडियेशन की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाने एवं सामुदायिक मध्यस्थता तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएँ एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन ग्रामों से चयनित 15 कम्यूनिटी मीडियेटर्स इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे, जिन्हें Potential Trainers द्वारा कम्यूनिटी मीडियेशन की संपूर्ण प्रक्रिया, उसके व्यावहारिक पक्षों एवं विवाद समाधान के कौशलों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।उल्लेखनीय है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने हेतु मल्टी सेक्टोरियल एप्रोच (Multi-Sectoral Approach) को अपनाया गया है। इसके अंतर्गत राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला दुर्ग स्थित समस्त विधि महाविद्यालयों के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण का सक्रिय सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।
वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” की दिशा में अभिनव पहल : कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज
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