भिलाई 7 जुलाई 2026। पी.जी. कॉलेज ऑफ नर्सिंग, भिलाई के प्रसूति एवं स्त्री रोग नर्सिंग विभाग एवं सोसाइटी ऑफ मिडवाइव्स इंडिया (SOMI), छत्तीसगढ़ चैप्टर तथा हिमालया वेलनेस कंपनी के सहयोग से पीडब्ल्यूडी कॉन्फ्रेंस हॉल, दुर्ग में “अभिनव, एकीकृत और प्रेरित: मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में आयोजित की गई, जिससे विभिन्न संस्थानों के नर्सिंग पेशेवरों, संकाय सदस्यों (फैकल्टी) और छात्रों की भागीदारी संभव हो सकी।कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों के हार्दिक स्वागत के साथ हुई, जिसके बाद औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में जिला अस्पताल दुर्ग के सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथियों में सोसाइटी ऑफ मिडवाइव्स इंडिया (SOMI) की संस्थापक और सलाहकार डॉ. एम. प्रकाशम्मा, पी.जी. कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्या डॉ. रोजा प्रिंसी, पी.जी. कॉलेज ऑफ नर्सिंग की उप-प्राचार्या डॉ. जी. हेमावती, एसओएमआई सीजी चैप्टर की अध्यक्ष डॉ. सुशीला बैस और जीएनटी दुर्ग की प्राचार्या श्रीमती पुष्पा बांधे शामिल थीं। अपने प्रेरक संबोधनों के माध्यम से, उन्होंने मातृ और नवजात शिशु की गुणवत्तापूर्ण देखभाल, साक्ष्य-आधारित अभ्यास (एविडेंस-बेस्ड प्रैक्टिस) के महत्व और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए मिडवाइफरी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।वैज्ञानिक सत्र इस क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञों द्वारा दिए गए। जिला अस्पताल दुर्ग की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता ध्रुवे ने ‘प्रसवोत्तर रक्तस्राव’ (Postpartum Haemorrhage – PPH) और परिवार नियोजन पर एक जानकारीपूर्ण सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें वर्तमान प्रबंधन रणनीतियों और निवारक तरीकों पर प्रकाश डाला गया। प्रसूति एवं स्त्री रोग नर्सिंग विभाग की प्रमुख डॉ. सुशीला बैस ने ‘सम्मानजनक मातृत्व देखभाल’ (Respectful Maternity Care) पर एक व्यावहारिक व्याख्यान दिया, जिसमें गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गरिमापूर्ण, महिला-केंद्रित और करुणामय देखभाल के महत्व पर जोर दिया गया। प्रसूति एवं स्त्री रोग नर्सिंग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा संतोष ने सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने और मातृ परिणामों में सुधार लाने में दाइयों (मिडवाइव्स) की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘मिडवाइफ-नेतृत्व वाली प्रसवपूर्व देखभाल’ (Midwifery-Led Antenatal Care) पर एक उत्कृष्ट सत्र प्रस्तुत किया। सहायक प्रोफेसर श्रीमती ज्योति वर्मा ने भी प्रतिभागियों के साथ आवश्यक नवजात शिशु देखभाल पर मूल्यवान ज्ञान और व्यावहारिक बातें साझा कीं। संगोष्ठी का दूसरा भाग कौशल प्रदर्शन (स्किल डिमॉन्स्ट्रेशन) के लिए समर्पित था, जिससे प्रतिभागियों को मूल्यवान व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। सामान्य योनि प्रसव (नॉर्मल वेजाइनल डिलीवरी) और अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण (IUCD) लगाने का प्रदर्शन श्रीमती प्रेरणा, श्रीमती संगीता, श्रीमती प्रियंका, सुश्री ऐश्वर्या और सुश्री तेजेश्वरी द्वारा किया गया। ये प्रदर्शन अत्यधिक संवादात्मक (इंटरैक्टिव) थे और इसने प्रतिभागियों को आवश्यक मिडवाइफरी कौशल में अपनी व्यावहारिक दक्षताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाया।संगोष्ठी में एम.एससी (नर्सिंग), एएनएम, जीएनएम और जिला अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, संकाय सदस्यों और विभिन्न नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की उत्साही भागीदारी देखी गई। वैज्ञानिक सत्रों, संवादात्मक चर्चाओं और व्यावहारिक प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों के ज्ञान और नैदानिक कौशल (क्लिनिकल स्किल्स) को काफी समृद्ध किया।कार्यक्रम का समापन एक आकर्षक फीडबैक सत्र के बाद औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। इस संगोष्ठी ने मातृ और नवजात शिशु की देखभाल में नवाचार, एकीकरण और प्रेरणा को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्ट शैक्षणिक मंच के रूप में कार्य किया, साथ ही नर्सिंग और मिडवाइफरी अभ्यास की गुणवत्ता को बढ़ाने और पेशेवर सहयोग को मजबूत किया।
मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल: अभिनव, एकीकृत और प्रेरित विषय पर एक-दिवसीय संगोष्ठी संपन्न
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