अक्सर हम सोचते हैं कि आपदा या कोई बड़ी दुर्घटना हमारे साथ नहीं होगी। आग, गैस रिसाव, सड़क दुर्घटना, अचानक किसी के बेहोश होने, भूकंप, बाढ़ या भूस्खलन जैसी घटनाएं हमें दूर की बातें लगती हैं। लेकिन जब कोई आपात स्थिति सामने आती है तो हमारे पास सोचने और योजना बनाने का समय बहुत कम होता है।।यही कारण है कि Emergency Plan यानी आपातकालीन योजना केवल बड़ी आपदा के लिए नहीं, बल्कि हर परिवार की जरूरी तैयारी होनी चाहिए।
आपात स्थिति में सबसे बड़ी समस्या हमेशा घटना नहीं होती, बल्कि कई बार घबराहट, गलत निर्णय और तैयारी का अभाव स्थिति को और गंभीर बना देता है।
इसलिए आज सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “अगर कभी ऐसी स्थिति आई तो क्या होगा?”
सवाल यह होना चाहिए “अगर अभी ऐसी स्थिति आ जाए तो क्या हमारा परिवार तैयार है?” और अगर ऐसी स्थिति हमारे सामने आ ही जाए, तो उस समय क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से हमने आपके लिए कुछ ऐसे सरल और व्यावहारिक सुझाव तैयार किए हैं, जिन्हें आपात स्थिति में सही समय पर अपनाना किसी के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। ये बातें केवल किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार के हर सदस्य, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए जानना जरूरी है।
1. संकट अचानक आता है, तैयारी पहले करनी होती है
किसी घर में आग लगना, गैस रिसाव होना, सड़क पर दुर्घटना देखना, परिवार के किसी सदस्य का अचानक बेहोश हो जाना या बारिश के दौरान बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति बनना. इनमें से किसी के लिए भी हमें पहले से तारीख नहीं बताई जाती। लेकिन तैयारी की जा सकती है। परिवार को पहले से यह तय करना चाहिए कि आपात स्थिति में :—
# किस व्यक्ति को सबसे पहले सूचना दी जाएगी?
# घर से बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता कौन-सा है?
# परिवार के सदस्य अलग हो जाएं तो कहां मिलेंगे?
# बच्चों, बुजुर्गों या ऐसे व्यक्ति की मदद कौन करेगा जिसे विशेष सहायता की जरूरत हो?
# आवश्यक दस्तावेज और जरूरी सामान कहां रखा है?
# आपातकालीन सहायता के लिए किस नंबर पर फोन करना है?
भारत में 112 एकीकृत आपातकालीन सहायता नंबर है, जिसके माध्यम से पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य और अन्य आपात सहायता के लिए मदद मांगी जा सकती है। यह सेवा 24×7 उपलब्ध है।
मोबाइल में नंबर सेव होना अच्छी बात है, लेकिन परिवार के प्रत्येक सदस्य को यह भी पता होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर मदद कैसे मांगी जाए।
2. हर परिवार के पास एक छोटी Emergency Kit होनी चाहिए
आपात स्थिति में कई बार कुछ मिनटों या घंटों के लिए सामान्य सुविधाएं बाधित हो सकती हैं। इसलिए घर में एक ऐसी जगह पर जरूरी सामान का छोटा बैग या बॉक्स तैयार रखा जा सकता है जिसे सभी सदस्य जानते हों। इसमें आवश्यकता के अनुसार :—
First-Aid सामग्री, लाइटर, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, जरूरी दवाइयां, पीने का पानी, कुछ जरूरी खाद्य सामग्री, जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां और महत्वपूर्ण संपर्क नंबरों की सूची रखी जा सकती है।
बारिश के मौसम में टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी विशेष रूप से उपयोगी हो सकती हैं। आपदा की स्थिति में मोमबत्ती की तुलना में टॉर्च या आपातकालीन लाइट अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकती है।
जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां सुरक्षित स्थान पर रखना भी उपयोगी है, लेकिन केवल मोबाइल पर निर्भर रहने के बजाय आवश्यक कागजात की प्रतियां भी सुरक्षित रखना बेहतर है।
3. बच्चों को भी Emergency Training क्यों जरूरी है?
आपात स्थिति में बच्चे सबसे ज्यादा घबरा सकते हैं। इसलिए उन्हें डराने के बजाय उम्र के अनुसार सरल तरीके से आपातकालीन व्यवहार सिखाना जरूरी है। बच्चों को पता होना चाहिए :—
# घर का पूरा पता क्या है?
# माता-पिता या अभिभावक का फोन नंबर क्या है?
# आपात स्थिति में किस विश्वसनीय व्यक्ति से मदद मांगनी है?
# आग या धुएं की स्थिति में क्या करना है?
# बाढ़ के पानी के पास क्यों नहीं जाना है?
# किसी दुर्घटना में भीड़ लगाने या घायल व्यक्ति को बिना समझे खींचने के बजाय मदद कैसे बुलानी है?
सबसे महत्वपूर्ण बात. बच्चे को यह समझाएं कि आपात स्थिति में छिपना नहीं है, घबराकर इधर-उधर भागना नहीं है और खतरे वाली जगह को देखने के लिए उसके पास नहीं जाना है। बच्चों को बचपन से यह सिखाना जीवन कौशल है, परीक्षा का कोई पाठ नहीं।
4. संकट के पहले 5 मिनट, सही कदम सबसे महत्वपूर्ण
आपात स्थिति के शुरुआती कुछ मिनट बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए हर परिस्थिति में पहला नियम होना चाहिए, पहले अपनी सुरक्षा, फिर सुरक्षित तरीके से दूसरे की सहायता और तुरंत विशेषज्ञ मदद।
आग लगने पर :- धुएं और आग से दूर निकलने का प्रयास करें, दूसरों को सचेत करें और जरूरत पड़ने पर 112 से मदद मांगें। धुएं से भरे स्थान में अनावश्यक रूप से वापस जाने या सामान निकालने की कोशिश न करें।
गैस रिसाव की आशंका पर :- आग या माचिस न जलाएं और बिजली के स्विच को चालू-बंद करने से बचें। यदि सुरक्षित हो तो गैस का स्रोत बंद करें, स्थान से बाहर निकलें और सहायता बुलाएं।
सड़क दुर्घटना में :- पहले यह देखें कि आपकी अपनी सुरक्षा खतरे में तो नहीं है। ट्रैफिक के बीच सीधे उतरकर खुद को खतरे में डालना मदद नहीं है। सुरक्षित स्थान से आपातकालीन सहायता बुलाएं और प्रशिक्षित न होने पर घायल व्यक्ति के साथ अनावश्यक प्रयोग न करें।
किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने पर :- तुरंत सहायता बुलाएं और उसकी स्थिति की जांच करें। यदि व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है और आपको CPR का प्रशिक्षण है, तो प्रशिक्षण के अनुसार सहायता शुरू की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना जरूरी है।
भूकंप के समय :- घबराकर सीढ़ियों या बाहर की ओर दौड़ने के बजाय तत्काल सुरक्षित स्थान लेने पर ध्यान दें और खिड़कियों, कांच तथा गिरने वाली वस्तुओं से दूरी बनाएं।
भारी बारिश, अचानक बाढ़ या बादल फटने जैसी स्थिति में :- तेज बहते पानी को पार करने या उसके बीच वाहन चलाने की कोशिश न करें। बच्चों को बाढ़ के पानी के पास न जाने दें। सुरक्षित और ऊंचे स्थान की ओर जाने के लिए प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। NDRF भी तेज बहाव वाले पानी में पैदल या वाहन से जाने से बचने की सलाह देता है।
भूस्खलन यानी Landslide की आशंका में :- लगातार भारी बारिश के दौरान पहाड़ी या ढलान वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी जरूरी है। यदि भूस्खलन शुरू हो जाए तो उसके रास्ते से तुरंत दूर हटना सबसे सुरक्षित कदमों में से एक है। कमजोर ढलान, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र और प्रशासन द्वारा खाली कराए गए स्थानों से दूर रहना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात: आपदा के समय वीडियो बनाने, फोटो खींचने या तमाशा देखने के लिए खतरे के करीब जाना आपकी और बचाव कार्य की दोनों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
5. आपातकालीन कॉल में सिर्फ “जल्दी आइए” कहना पर्याप्त नहीं
घबराहट में हम अक्सर फोन करके केवल इतना कहते हैं, “यहां दुर्घटना हो गई है, जल्दी आइए।” लेकिन मदद पहुंचाने वालों के लिए सही जानकारी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आपातकालीन सहायता मांगते समय संभव हो तो स्पष्ट रूप से बताएं :—
आप कहां हैं, किस प्रकार की घटना हुई है, कितने लोग प्रभावित हैं और तत्काल खतरा किस प्रकार का है। 112 की आपातकालीन प्रणाली में कॉल के साथ स्थान की पहचान और संबंधित सेवाओं तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था भी है। इसलिए फोन करने वाला व्यक्ति घबराने के बजाय जितनी सटीक जानकारी दे सकता है, उतनी दे। और याद रखें, 112 आपात स्थिति के लिए है, सामान्य जानकारी या मजाक के लिए नहीं। अनावश्यक कॉल वास्तविक संकट में फंसे व्यक्ति तक मदद पहुंचने में बाधा बन सकती है।
6. केवल मदद मांगना नहीं, खतरे के संकेतों को पहचानना भी जरूरी है
आपदा के समय हर व्यक्ति बोलकर मदद नहीं मांग सकता। कोई व्यक्ति घायल हो सकता है, फंस सकता है या ऐसी परिस्थिति में हो सकता है जहां आवाज लगाना संभव न हो। इसलिए परिवार और समाज में खतरे के संकेतों को पहचानने की समझ भी होनी चाहिए। किसी व्यक्ति का असामान्य तरीके से बार-बार प्रकाश संकेत देना, लगातार ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करना या किसी स्थान से असामान्य संकेत मिलना, इन बातों को हमेशा नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लेकिन यहां सावधानी भी जरूरी है। हर असामान्य संकेत को तुरंत खतरा मानने के बजाय स्थिति को सुरक्षित दूरी से समझें और वास्तविक खतरे की आशंका होने पर उचित अधिकारियों को सूचना दें।
कई बार किसी की जिंदगी बचाने के लिए मदद करने वाले व्यक्ति से ज्यादा जरूरी होता है कि कोई दूसरा व्यक्ति उस मदद के संकेत को समय पर पहचान ले।
7. आज ही करें परिवार का 10 मिनट का Emergency Drill
# इस पूरे लेख को पढ़ने के बाद सबसे जरूरी काम यह है कि हम इसे केवल पढ़कर छोड़ न दें।
# आज परिवार के सभी सदस्य सिर्फ 10 मिनट बैठें और एक छोटा-सा Emergency Drill करें।
एक-दूसरे से पूछें :—
# अगर अभी घर में आग लग जाए तो हम किस रास्ते से बाहर निकलेंगे?
# अगर रात में बिजली चली जाए और बाहर तेज बारिश हो तो टॉर्च कहां है?
# अगर परिवार का कोई सदस्य घर से बाहर फंस जाए तो हम किससे संपर्क करेंगे?
# अगर अचानक बाढ़ या भूस्खलन की चेतावनी मिले तो हमें किस दिशा में सुरक्षित स्थान पर जाना है?
# क्या बच्चों को घर का पता और जरूरी फोन नंबर पता हैं?
# क्या First-Aid Box और Emergency Kit तैयार है?
इन सवालों के जवाब आज पता चल जाएं तो संकट आने पर घबराहट कम हो सकती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) भी अलग-अलग आपदाओं के लिए नागरिकों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसकी जानकारी उपलब्ध कराता है। उसका SACHET प्लेटफॉर्म अधिकृत सरकारी स्रोतों से आपदा संबंधी चेतावनियां और मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है।
हम अपने घर को सुंदर बनाने के लिए बहुत कुछ खरीदते हैं, बच्चों के भविष्य के लिए बचत करते हैं और आने वाले दिनों की कई योजनाएं बनाते हैं। लेकिन क्या हमने कभी यह योजना बनाई है कि अगर अचानक कोई आपात स्थिति आ जाए तो हमारा परिवार क्या करेगा? आपदा को रोकना हमेशा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन उसके लिए तैयार रहना हमारे हाथ में जरूर है। एक टॉर्च, एक First-Aid Box, कुछ जरूरी नंबर, परिवार की एक छोटी-सी योजना और सही समय पर लिया गया सही निर्णय, इनकी कीमत सामान्य दिनों में शायद बहुत छोटी लगे, लेकिन आपात स्थिति में यही छोटी तैयारी बहुत बड़ी साबित हो सकती है। बच्चों को सिर्फ किताबों में सुरक्षित रहने की बातें न पढ़ाएं, उन्हें जीवन में सुरक्षित रहना भी सिखाएं।
क्योंकि :— **मुसीबत आने का इंतजार करके तैयारी करना समझदारी नहीं है।
समझदारी यह है कि तैयारी आज हो और जरूरत पड़ने पर काम आए।**
सुरक्षित परिवार वही नहीं है जिसके घर में कभी संकट नहीं आता, बल्कि वह परिवार है जो संकट आने पर घबराता नहीं, सही कदम उठाना जानता है।




