दुनिया भर में विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 05 मई को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाएगा। दमा को अस्थमा भी कहते हैं। इस दिन को मानाने के पीछे मुख्य उद्देश्य अस्थमा बीमारी से पीड़ित लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना और अस्थमा के इलाज के तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
विश्व अस्थमा दिवस मई के पहले मंगलवार को दुनिया भर में मनाया जाता है. इस साल यानी 2026 में विश्व अस्थमा दिवस 05 मई यानी आज मनाया जा रहा है. यह खास दिन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसे 1993 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के समर्थन से स्थापित किया गया था. इस बीमारी के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और अस्थमा की समस्या में जड़ से उखाड़ने के उद्देश्य से इस दिन को धूमधाम से आयोजित किया जाता है. इसका उद्देश्य दुनिया भर में अस्थमा के प्रति शिक्षा और प्रबंधन को बढ़ावा देना भी है।
विश्व अस्थमा दिवस के बारे में जानकारी
कार्यक्रम नाम : विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day)
कार्यक्रम दिनांक : मई माह का पहला मंगलवार / मई
वर्ष 2026 की थीम : “सभी के लिए इनहेल्ड उपचार सुलभ बनाएं”
कार्यक्रम की शुरुआत : 1998
कार्यक्रम का स्तर : अंतरराष्ट्रीय
कार्यक्रम आयोजक : ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA)
विश्व अस्थमा दिवस का संक्षिप्त विवरण
विश्व अस्थमा दिवस हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में अस्थमा की बीमारी और देखभाल के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। जबकि primary focus अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति, परिवार, दोस्तों और देखभाल करने वालों का सपोर्ट करना होता है।
विश्व अस्थमा दिवस का इतिहास
विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा हर साल आयोजित किया जाता है। 1998 में, बार्सिलोना, स्पेन में पहली विश्व अस्थमा बैठक के संयोजन में 35 से अधिक देशों में पहला विश्व अस्थमा दिवस मनाया गया। इस दिन संपूर्ण विश्व में अस्थमा के रोगियों को अस्थमा नियंत्रित रखने के लिए प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
विश्व अस्थमा दिवस का उद्देश्य
विश्व अस्थमा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य है विश्वभर के लोगों को अस्थमा बीमारी के बारे में जागरूक करना। एक अनुमान के मुताबिक भारत में अस्थमा के रोगियों की संख्या लगभग 15 से 20 करोड़ है जिसमें लगभग 12 प्रतिशत भारतीय शिशु अस्थमा से पीड़ित हैं। विश्व अस्थमा दिवस का आयोजन प्रत्येक वर्ष ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (जीआईएनए) द्वारा किया जाता है। वर्ष 1998 में पहली बार बार्सिलोना, स्पेन सहित 35 देशों में विश्व अस्थमा दिवस मनाया गया।
विश्व अस्थमा दिवस 2026 की थीम
वर्ष 2026 में विश्व अस्थमा दिवस की थीम है – “Make Inhaled Treatments Accessible for ALL” (सभी के लिए इनहेल्ड उपचार सुलभ बनाएं) है। यह थीम ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) द्वारा चुनी गई है और इसका मुख्य उद्देश्य अस्थमा से पीड़ित हर व्यक्ति को आवश्यक इनहेल्ड दवाओं (सूजनरोधी एवं रिलीफ इनहेलर) तक समान, किफायती और बाधारहित पहुंच सुनिश्चित करना है। जिसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में करोड़ों अस्थमा मरीजों को इनहेलर दवाओं की कमी, उच्च लागत या स्वास्थ्य‑सेवा तक पहुंच में आने वाली बाधाओं के कारण उचित इलाज नहीं मिल पाता; इस समस्या पर जोर देना। अस्थमा के तीव्र हमलों, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करने के लिए नियमित और समय पर इनहेल्ड उपचार को जन‑स्तर पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता हाइलाइट करना।
इनहेल्ड उपचार सुलभता पर जोर
इस वर्ष की थीम उन दवाओं पर विशेष ध्यान देती है जो मरीज सीधे सांस की वायुमार्ग में इनहेल (सूंघ) कर लेते हैं, क्योंकि यह तरीका फेफड़ों तक दवा छोटी खुराक में सीधे पहुंचाने के कारण सबसे प्रभावी और कम दुष्प्रभाव वाला माना जाता है। थीम के तहत नीति निर्माताओं द्वारा स्वास्थ्य‑विभागों और निजी स्वास्थ्य‑सेवा प्रदाताओं से अपील की जा रही है कि इनहेलरों को सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, जन‑हेल्थ योजनाओं और बेसिक दवा सूची में शामिल कर सस्ती या निशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित करें।
सामाजिक‑आर्थिक समानता पर जोर
थीम “सभी के लिए” (for ALL) के शब्द पर जोर देकर यह बताया जा रहा है कि अस्थमा उपचार धन‑स्तर, भौगोलिक स्थिति या ग्रामीण‑शहरी भेदभाव के आधार पर नहीं बंटना चाहिए। इस थीम के तहत ग्रामीण और कम‑आय वर्ग के रोगियों तक सही इनहेलर उपकरण, डॉक्टरों की परामर्श और रोग‑शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जागरूकता और जीवनशैली पर संदेश
इस थीम के साथ ही अस्थमा के नियंत्रण हेतु जागरूकता, वायु प्रदूषण से बचाव, धूम्रपान रोक और स्वस्थ जीवनशैली को भी जोड़ा गया है, ताकि इनहेलरों की उपलब्धता के साथ‑साथ बीमारी की बारंबारता और गंभीरता कम हो सके। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इस दिन पर यह जागरूकता फैला रहे हैं कि अच्छे जीवन‑स्तर और नियमित इनहेलर उपयोग से अस्थमा रोगी सामान्य, सक्रिय और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
विश्व अस्थमा दिवस के बारे में अन्य विवरण
अस्थमा (दमा) किसे कहते है?अस्थमा बच्चों और वयस्कों को प्रभावित करने वाले श्वसन पथ की एक पुरानी गैर-संचारी बीमारी है। अस्थमा या दमा श्वसन तंत्र की बीमारी है जिसके कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि श्वसन मार्ग में सूजन आ जाने के कारण वह संकुचित हो जाती है। इस कारण छोटी-छोटी सांस लेनी पड़ती है, छाती मे कसाव जैसा महसूस होता है, सांस फूलने लगती है और बार-बार खांसी आती है।
बच्चों की ही बीमारी नहीं है
पहले आमतौर यह लोग मानते रहे कि अस्थमा सिर्फ बच्चों में होता है। जब उनका सही से उपचार नहीं हो पाता, तो वह लंबे समय तक बना रहता है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि अस्थमा की शुरुआत 50 या 60 साल की उम्र में भी हो सकती है। हमें यह नहीं मानना चाहिए कि यह सिर्फ बच्चों की बीमारी है।
अस्थमा के कारण
अस्थमा का एटैक आने के बहुत सारे कारणों में वायु का प्रदूषण भी एक कारण है। एलर्जी के अलावा भी दमा होने के बहुत से कारणों में से कुछ इस प्रकार है-
* धूल भरा वातावरण।
* घर के पालतू जानवर।
* बाहर का वायु प्रदूषण।
* सुगंधित सौन्दर्य (perfumed cosmetics) प्रसाधन।
* सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस (bronchitis) और साइनसाइटिस (sinusitis) का संक्रमण
* ध्रूमपान।
* अधिक मात्रा में शराब पीना।
* सर्दी के मौसम में ज़्यादा ठंड।
* तनाव या भय के कारण।
* अतिरिक्त मात्रा में प्रोसेस्ड या जंक फूड खाने के कारण।
* ज़्यादा नमक खाने के कारण।
* आनुवांशिकता (heredity) के कारण आदि।
कोई भी हो सकता हैं कारण
अस्थमा होने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। जब अस्थमा का कोई मरीज डाक्टर के पास जाता है, जो उसका फिनोटाइप और एंडोटाइप टेस्ट किया जाता है। इससे अस्थमा की बीमारी का वर्गीकरण करने का प्रयास किया जाता है। कुछ अस्थमा एस्नोफिलिक और कुछ नान-एस्नोफिलिक होते हैं। इसमें उन खास तरह की कोशिकाओं को देखा जाता है, जो श्वास नली में सूजन के लिए जिम्मेदार होती हैं। रक्त की जांच कर समस्या के कारणों को जाना जाता है।
अस्थमा के लक्षण
अस्थमा के लक्षण की बारे में बात करते ही पहली बात जो मन में आती है, वह है साँस लेने में कठिनाई। अस्थमा का रोग या तो अचानक शुरू होता है या खाँसी, छींक या सर्दी जैसे एलर्जी वाले लक्षणों से शुरू होता है।
* साँस लेने में कठिनाई होती है।
* सीने में जकड़न जैसा महसूस होता है।
* दमा का रोगी जब साँस लेता है तब एक घरघराहट जैसा आवाज होती है।
* साँस तेज लेते हुए पसीना आने लगता है।
* बेचैनी-जैसी महसूस होती है।
* सिर भारी-भारी जैसा लगता है।
* जोर-जोर से साँस लेने के कारण थकावट महसूस होती है।
* स्थिति बिगड़ जाने पर उल्टी भी हो सकती है।
कोई भी स्थायी लक्षण नहीं
अस्थमा श्वास नली की एलर्जी है। हालांकि एटोपिक अस्थमा में आंख एलर्जी भी हो सकती है। नाक या त्वचा की एलर्जी हो सकती है। अस्थमा में रेस्पिरेटरी और एक्स्ट्रो-रेस्पेरेटरी लक्षण हो सकते हैं। रेस्पिरेटरी लक्षणों में सामान्य तौर पर सांस फूलती है। खास बात है कि यह समस्या हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी मरीज बिल्कुल ठीक रहेगा, तो कभी सांस बहुत अधिक फूलने लगेगी। यह समय किसी के लिए सुबह का हो सकता है, तो किसी के लिए दोपहर का। किसी को यह परेशानी सप्ताह में, तो किसी को महीने में हो सकती है। श्वास से संबंधित बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में देखा गया है कि सूजन के कारण सांस फूलने, खांसी और कफ की समस्या सामने आने लगती है।
बचाव के उपाय
* आपके आसपास की हवा स्वच्छ होनी जरूरी है।
* धूल और प्रदूषण से बचें।
* इनहेलर का प्रयोग कर रहे हैं, तो उसे जारी रखें।
* यदि मरीज को पहले से कारण पता है, तो उसे अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
* दो बातों का हमेशा ध्यान रखें
* पहली, सांस की दिक्कत बढ़ने न पाएं और दूसरी, श्वास नली के सूजन के कारकों से दूर रहें।
दिनचर्या को बना सकते हैं सामान्य
अगर अस्थमा का सही तरीके से इलाज हो, तो पीड़ित व्यक्ति सामान्य जिंदगी जी सकता है। इनहेलर्स का प्रयोग करते रहें, तो सांस नली का सूजन खत्म हो सकता है। यदि इसके बावजूद अचानक कभी समस्या बढ़ जाए, तो रिलीवर इनहेलर्स भी आते हैं। ये कुछ घंटों के लिए आराम दे देते हैं। इनहेलर्स का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। यह सीधे फेफड़ों में जाता है।
भ्रांतियों से रहें दूर
इनहेलर्स का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को लगता है कि इसकी आदत या नशा हो सकता है। यह पूरी तरह से भ्रम है कि अस्थमा के मरीज को इसकी लत लगती है। ध्यान रखें, जिनकी सांस की नली में सूजन है, उनको इसकी जरूरत पड़ती है।
अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
एक दमा रोगी को अपनी दवा का ठीक से पालन करना चाहिए और हमेशा अपने नेबुलाइज़र और इनहेलर को संभाल कर रखना चाहिए। अस्थमा से पीड़ित लोगों को स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए और उन्हें ज्यादा से ज्यादा ताजी हवा लेनी चाहिए।विश्व अस्थमा दिवस पर हमें याद रखना चाहिए कि अगर अस्थमा को गंभीर बीमारी नहीं माना जाता है तो हम हवा को भी जरूरी नहीं कह सकते।
विश्व अस्थमा दिवस केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक वैश्विक प्रयास है ताकि अस्थमा रोग को नियंत्रित किया जा सके और प्रभावित लोगों को बेहतर जीवन प्रदान किया जा सके। इस वर्ष की थीम “Make Inhaled Treatments Accessible for ALL” हमें याद दिलाती है कि जानकारी ही शक्ति है, और सही शिक्षा से ही इस रोग को हराया जा सकता है। हम सभी का कर्तव्य है कि इस जागरूकता में योगदान दें और अस्थमा मुक्त समाज की ओर कदम बढ़ाएं।
(“डिस्क्लेमर- यह टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर द्वारा चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।”)




