भिलाई 22 जुलाई 2026। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय केवल टैक्स कम करने पर ध्यान देना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है। अधूरी जानकारी और गलत सलाह के आधार पर भरा गया रिटर्न बाद में नोटिस, ब्याज, पेनाल्टी और लंबे कर-विवाद की वजह बन सकता है। इसलिए करदाताओं को ऐसा रिटर्न दाखिल करना चाहिए, जिसकी प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर वर्षों बाद भी समझाया जा सके।भिलाई सीए ब्रांच के पूर्व चेयरमैन एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए पीयूष जैन** ने कही। उन्होंने बताया कि आयकर रिटर्न अब केवल सालभर की आय बताने वाला फॉर्म नहीं है, बल्कि यह करदाता की पूरी वित्तीय स्थिति और विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बन चुका है।सीए जैन ने कहा कि कई करदाता रिटर्न बनवाते समय अपने कंसल्टेंट को सभी बैंक खातों, नकद लेन-देन, निवेश, ऋण, प्रॉपर्टी खरीद, कैपिटल गेन और कृषि आय की पूरी जानकारी नहीं देते। कुछ मामलों में कंसल्टेंट भी उपलब्ध सीमित जानकारी के आधार पर जल्दबाजी में रिटर्न तैयार कर देता है। उस समय रिटर्न दाखिल हो जाता है, लेकिन बाद में अलग-अलग वित्तीय लेन-देन सामने आने पर उसे समझाना कठिन हो सकता है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में आयकर विभाग को PAN, Aadhaar, AIS, Form 26AS, TDS, TCS, बैंकिंग प्रणाली, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य रिपोर्टिंग संस्थाओं से वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिलती रहती है। कोई लेन-देन वर्तमान AIS में दिखाई नहीं दे रहा है, इसका अर्थ यह नहीं है कि उसकी जानकारी भविष्य में विभाग तक नहीं पहुंचेगी।सीए पीयूष जैन ने बताया कि छोटे व्यापारियों के लिए लागू Section 44AD का उद्देश्य अकाउंटिंग और ऑडिट संबंधी अनुपालन को आसान बनाना है। इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल टर्नओवर पर 6 या 8 प्रतिशत लाभ दिखाकर रिटर्न दाखिल कर दिया जाए।रिटर्न तैयार करने से पहले बैंक में आए कुल क्रेडिट, नकद जमा, UPI प्राप्तियां, GST टर्नओवर, बड़े निवेश, ऋण संबंधी लेन-देन, घरेलू खर्च और पूंजी की स्थिति का व्यापक मिलान आवश्यक है। यदि घोषित आय और वास्तविक वित्तीय गतिविधियों में बड़ा अंतर दिखाई देता है, तो भविष्य में निवेश के स्रोत को लेकर प्रश्न उठ सकते हैं।उन्होंने कहा, “Section 44AD करदाता को बुक्स ऑफ अकाउंट की जटिलता से राहत देता है, वास्तविक तथ्यों से नहीं।उन्होंने Section 44ADA के अंतर्गत रिटर्न भरने वाले डॉक्टरों और अन्य प्रोफेशनल्स को भी सावधानी बरतने की सलाह दी। केवल ग्रॉस रिसीप्ट की 50 प्रतिशत आय घोषित कर देना हर स्थिति में पर्याप्त नहीं होता।यदि किसी प्रोफेशनल ने उसी वर्ष म्यूचुअल फंड, एफडी, जमीन या अन्य संपत्तियों में बड़ा निवेश किया है, तो निवेश के स्रोत का उचित विवरण होना जरूरी है। पुराने निवेश, बचत, ऋण, उपहार या संपत्ति की बिक्री से धन प्राप्त हुआ हो सकता है, लेकिन उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहना चाहिए।कृषि आय के संबंध में सीए जैन ने कहा कि केवल जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर अनुमानित आय नहीं दर्शानी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि वास्तव में खेती हुई या नहीं, कौन-सी फसल ली गई, भूमि सिंचित थी या असिंचित, फसल कहां बेची गई और बिक्री अथवा बैंकिंग से संबंधित क्या प्रमाण उपलब्ध हैं।उन्होंने कहा, “कृषि आय खेत देखकर नहीं, खेती देखकर तय होती है।सीए जैन ने कहा कि AIS रिटर्न तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन उसे अंतिम सत्य मानना भी गलत है। बोनस शेयर, विरासत में मिली संपत्ति, ऑफ-मार्केट ट्रांसफर, गिफ्ट, फैमिली सेटलमेंट, डिमर्जर, अमलगमेशन और पुराने मालिक की लागत जैसे मामलों में दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों की अलग से जांच आवश्यक होती है।उन्होंने कहा, “AIS डेटा देता है, लेकिन सही टैक्स ट्रीटमेंट का निर्णय दस्तावेजों और कानून के आधार पर लिया जाता है।”सीए पीयूष जैन ने कहा कि सही रिटर्न तैयार करना करदाता और टैक्स कंसल्टेंट दोनों की साझा जिम्मेदारी है। करदाता को सभी आय स्रोतों, बैंक खातों, निवेश, ऋण, उपहार, संपत्ति लेन-देन, विदेशी संपत्तियों, कृषि आय और बड़े नकद लेन-देन की जानकारी समय पर देनी चाहिए।कंसल्टेंट को भी बैंक स्टेटमेंट, AIS, Form 26AS, GST आंकड़ों, निवेश और पिछले वर्षों के रिकॉर्ड के बीच तार्किक सामंजस्य देखना चाहिए। आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर करदाता को संभावित जोखिम के बारे में लिखित रूप से जानकारी दी जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि सबसे अच्छी टैक्स प्लानिंग वह नहीं है, जिसमें हर हाल में सबसे कम टैक्स दिखाया जाए। बेहतर टैक्स प्लानिंग वह है, जिसमें कानून का पालन करते हुए ऐसा रिटर्न तैयार हो, जिसे भविष्य में भी पूरे विश्वास के साथ सही साबित किया जा सके।रिटर्न ऐसा भरिए जिसे विभाग से पहले आप स्वयं पढ़कर प्रत्येक आंकड़े का आधार बता सकें। कम टैक्स दिखाना सफलता नहीं है, सही और स्पष्ट रिटर्न दाखिल करना वास्तविक सफलता है।”
कम टैक्स के चक्कर में अधूरी जानकारी के साथ न भरें ITR : सीए पीयूष जैन,,,,, कहा– रिटर्न ऐसा हो, जिसे वर्षों बाद भी दस्तावेजों के आधार पर समझाया जा सके
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