भिलाई 24 अप्रैल, 2026। (सीजी संदेश) : शहर के प्रतिष्ठित अस्पतालों को फर्जी तरीके से ब्लैकमेलिंग करने वाले ब्लैक मेलर को पुलिस ने धर दबोचा है। आज लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला में मुलाहीजा के लिए लाया गया । डॉक्टरों की टीम ने मुलाहैीजा किया। सूत्रों की माने तो आरोपी अस्पताल में पहुंचते ही कई प्रकार का नाटक करने लगा। बड़े-बड़े नेताओं के साथ फोटो और फर्जी लेटर मिलने के बाद पुलिस आरोपी की सरगरमी से तालाश कर रही है। यह जिले में अपने तरीके का पहला मामला है। शहर के बड़े अस्पतालों की छवि धूमिल और उनके के नाम से उगाही कर रहा था। पुलिस ने मुखबिर के जरिए पता लगा हैी लीिया है। गौरतलब है कि यह मामला शहर के प्रतिष्ठित सरदार बीरा सिंह (एस.बी.एस. हॉस्पिटल), पावर हाउस क्षेत्र क था। मामला अस्पताल प्रबंधन से 5 लाख रुपये की अवैध मांग और धमकी से जुड़ा हुआ था। आवेदक निर्मल सिंह (47 वर्ष), निवासी कुरूद रोड, कोहका, साकेत नगर, वार्ड क्रमांक 7, भिलाई, जो कि एस.बी.एस. हॉस्पिटल में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, ने शिकायत में बताया कि गुरुमीत सिंह वाधवा (लगभग 55 वर्ष), निवासी सुन्दर नगर भिलाई, द्वारा उन्हें लगातार ब्लैकमेल कर 5,00,000 रुपये की मांग की जा रही है। शिकायत के अनुसार, गुरुमीत सिंह वाधवा अस्पताल में कैंसर के इलाज हेतु इंजेक्शन लगवाने आते थे, जिनका भुगतान अस्पताल प्रबंधन द्वारा विशेष अनुमति के तहत नहीं लिया जाता था।
क्योंकि अस्पताल विशेष चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत संचालित है इसलिए यहां समाज सेवा के उद्देश्य से निशुल्क सेवाएं दी जाती है। गुरुमीत सिंह वाधवा से भी कभी भी किसी सेवा के लिए पैसे नहीं लिए गए थे। हालांकि, आवश्यक बिलिंग प्रक्रिया के तहत जब अस्पताल द्वारा संबंधित दवाओं का बिल प्रस्तुत किया गया, तब आरोपित ने उसे फर्जी बताते हुए उल्टा अस्पताल प्रबंधन को ही ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। निर्मल सिंह का आरोप है कि आरोपी ने अस्पताल के चेम्बर में आकर खुलेआम पैसे की मांग की और मना करने पर गाली-गलौज करते हुए झूठे केस में फंसाने तथा आरटीआई लगाने की धमकी दी। घटना के समय वहां मौजूद स्टाफ और अन्य व्यक्तियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को देखा। पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे वे भयभीत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि घटना का सीसीटीवी फुटेज उनके पास सुरक्षित है, जो साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
प्रकरण के प्रथम दृष्टया परीक्षण में संबंधित आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा एवं संपत्ति की हानि की रोकथाम) अधिनियम 2010 की धारा 3 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
अब पीड़ित ने पुनः थाना प्रभारी, थाना छावनी को आवेदन देकर शीघ्र और उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।



