भिलाई। 19 सितम्बर, 2026, (सीजी संदेश) : जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय नीत भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 1 सितंबर से एक तुगलकी आदेश जारी कर अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के 400 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापकों तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन रोक दी है। यह फैसला साय सरकार के बुजुर्गों के प्रति असंवेदनशील और दमनकारी रवैये को उजागर करता है। मुकेश चंद्राकार ने कहा कि पिछले 37 वर्षों से इन प्राध्यापकों और कर्मचारियों को निरंतर पेंशन तथा ग्रेच्युटी का लाभ मिल रहा था। यहाँ तक कि पूर्ववर्ती डॉ. रमन सिंह की भाजपा सरकार ने भी वर्ष 2010 में पांचवें वेतनमान में पेंशन और चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी देने की व्यवस्था को मान्यता दी थी। लेकिन वर्तमान साय सरकार ने बुजुर्ग प्राध्यापकों का हक छीनने का काम किया है, जिससे ये बुजुर्ग इस उम्र में गंभीर आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा का सामना करने को मजबूर हो गए हैं। उच्च न्यायालय द्वारा बार-बार पेंशन देने के अधिकार को सही ठहराने और राज्य सरकार की याचिकाओं को खारिज किए जाने के बावजूद सरकार का रवैया बेहद हठधर्मिता से भरा रहा है। न्यायालय में हार के बाद भी साय सरकार ने 22 अगस्त को मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लेकर पेंशन बंद करने का फैसला सुना दिया, जो सीधे तौर पर उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन और जनहित की अनदेखी है।
जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से विष्णु देव साय सरकार से मांग की हैं कि अन्यायपूर्ण आदेश तुरंत वापस लिया जाए: सरकार 1 सितंबर के अपने इस तुगलकी आदेश को अविलंब निरस्त करे और पेंशन योजना पूर्ववत लागू रखे। बकाया पेंशन का तुरंत भुगतान करते हुए पिछले महीनों (जुलाई और अगस्त) की रुकी हुई पेंशन का भुगतान सेवानिवृत्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के खातों में शीघ्र अति शीघ्र किया जाए। सरकार बुजुर्ग पेंशनरों को परेशान करने और सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमेबाजी पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाने के बजाय उच्च न्यायालय के फैसलों का सम्मान करे। अंत में चेतावनी दी कि यदि विष्णु देव साय सरकार ने बुजुर्ग प्राध्यापकों और कर्मचारियों के अधिकारों को जल्द बहाल नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक सेवानिवृत्त प्राध्यापक संघ के समर्थन में उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा।



