आज 12 अगस्त 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष है और पूरी दुनिया के युवाओं के लिए भी। एक ओर छत्तीसगढ़ अपनी कृषि संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा लोकपर्व हरेली तिहार मना रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के माध्यम से युवाओं की भूमिका, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य में उनके योगदान पर विचार कर रही है। पहली नजर में दोनों अवसर अलग-अलग लग सकते हैं, लेकिन इनके भीतर एक गहरा संबंध है, एक हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और दूसरा हमें भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है और छत्तीसगढ़ में हरेली की हरियाली भी। इन दोनों अवसरों को साथ देखने पर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है, क्या हमारी नई पीढ़ी अपनी मिट्टी, खेती और परंपरा को सिर्फ याद रखेगी, या इन्हीं से अपने भविष्य के नए अवसर भी तलाशेगी? अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस हर वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से इस दिवस को मान्यता दी थी और पहली बार इसका आयोजन वर्ष 2000 में हुआ।
वहीं हरेली तिहार छत्तीसगढ़ के कृषि जीवन का ऐसा पर्व है जिसमें किसान खेती के औजारों की पूजा करते हैं। इसका मूल संदेश केवल एक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि खेती, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के प्रति सम्मान से जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस क्यों मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस हर वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1999 में 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मान्यता दी और पहला अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस वर्ष 2000 में मनाया गया। इसका उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों को दुनिया के सामने लाना और उन्हें समाज के विकास में सक्रिय भागीदार के रूप में देखना है।संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सांख्यिकीय दृष्टि से 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों को युवा माना जाता है। दुनिया में आज लगभग 1.2 अरब युवा इस आयु वर्ग में हैं। लेकिन युवा दिवस का अर्थ केवल युवाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार, निर्णय लेने की भागीदारी और अपनी क्षमता साबित करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं?।2026 के अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस का संदेश “Different contexts, common aspirations” यानी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन युवाओं की आकांक्षाएं समान हैं—इसी विचार के आसपास केंद्रित है।
हरेली केवल त्योहार नहीं, खेती और प्रकृति से हमारा रिश्ता है
छत्तीसगढ़ का हरेली तिहार सावन अमावस्या के अवसर पर मनाया जाने वाला कृषि और प्रकृति से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व है। हरेली शब्द का संबंध हरियाली से है। इस दिन किसान खेती में उपयोग होने वाले औजारों और पशुधन के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं तथा अच्छी फसल की कामना करते हैं। हरेली की खास बात यह है कि इसमें प्रकृति को केवल पूजा की वस्तु नहीं माना गया, बल्कि खेती, पशुधन, मौसम, पेड़-पौधों और ग्रामीण जीवन को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया है। यही कारण है कि हरेली आज भी केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति को समझने का अवसर है।
दोनों अवसरों को साथ देखने पर क्या दिखाई देता है?
एक तरफ हरेली हमें बताती है कि हमारा जीवन मिट्टी, पानी, खेती और प्रकृति से जुड़ा है।।दूसरी तरफ युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि इस बदलती दुनिया का भविष्य आज की युवा पीढ़ी के हाथ में है। अब सवाल यह है कि इन दोनों बातों को जोड़ा कैसे जाए? इसका उत्तर बहुत सीधा है :—
जिस खेती और प्रकृति पर हमारा जीवन निर्भर है, उसके भविष्य को बेहतर बनाने में युवाओं की भूमिका क्यों नहीं हो सकती? आज खेती के सामने केवल परंपरागत समस्याएं नहीं हैं। मौसम में बदलाव, पानी की उपलब्धता, खेती की बढ़ती लागत, बाजार तक पहुंच, भंडारण, फसल का उचित मूल्य और कृषि में कुशल श्रमिकों की जरूरत जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल पुराने तरीके से नहीं निकलेगा। यहां नई सोच, विज्ञान, तकनीक और युवा कौशल की जरूरत है।
खेती से दूर होता युवा, क्या इसे बदलना संभव है?
आज बहुत से युवा खेती को रोजगार के बजाय कम आय और अधिक मेहनत वाला पारंपरिक काम मानते हैं। यह सोच पूरी तरह गलत भी नहीं है, क्योंकि खेती वास्तव में जोखिम और मेहनत से जुड़ा क्षेत्र है।।लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब हम खेती को केवल हल चलाने और फसल उगाने तक सीमित समझ लेते हैं।आज कृषि के आसपास पूरी एक नई अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है। मिट्टी की जांच, मौसम की जानकारी, ड्रोन, कृषि मशीनरी, स्मार्ट सिंचाई, बीज तकनीक, फसल भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और किसानों को बाजार से जोड़ने जैसी अनेक गतिविधियां युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बन सकती हैं। इसलिए जरूरी नहीं कि हर युवा किसान बने। जरूरी यह है कि युवा कृषि की समस्या को समझे और उसके समाधान का हिस्सा बने।
गांव की समस्या से ही किसी युवा का नया व्यवसाय पैदा हो सकता है
# कल्पना कीजिए किसी गांव में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर जाना पड़ता है।
* कोई युवा डिजिटल माध्यम से स्थानीय किसानों को खरीदारों से जोड़ने का काम शुरू कर सकता है।
# किसी क्षेत्र में कृषि मशीनरी महंगी है।
* कोई युवा मशीनरी किराये पर उपलब्ध कराने की सेवा शुरू कर सकता है।
# किसानों को मिट्टी और मौसम की जानकारी समय पर नहीं मिलती।
* कोई युवा तकनीकी सेवा उपलब्ध करा सकता है।
# स्थानीय उत्पाद पैदा तो होते हैं लेकिन बाजार नहीं मिलता।
* कोई युवा उनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री का काम शुरू कर सकता है।
यानी रोजगार हमेशा किसी कार्यालय में खाली पड़ी कुर्सी के रूप में नहीं आता।कभी-कभी रोजगार किसी समस्या के समाधान के रूप में पैदा होता है।
बच्चों और विद्यार्थियों के लिए हरेली का एक नया पाठ
हम अक्सर बच्चों को बताते हैं कि हरेली हमारे पूर्वजों का त्योहार है। लेकिन आज के बच्चे इससे एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक सवाल भी सीख सकते हैं।
# किसान को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत कब पड़ती है?
# मिट्टी की गुणवत्ता कैसे पता चलती है?
# बारिश कम हो तो फसल को कैसे बचाया जा सकता है?
# कृषि में पानी और बिजली की बचत कैसे हो सकती है?
# किसान को अपनी उपज का बेहतर मूल्य कैसे मिल सकता है?
ऐसे सवाल पूछने वाला बच्चा केवल त्योहार नहीं समझ रहा होता, वह समस्या पहचानना और समाधान तलाशना सीख रहा होता है। यही वैज्ञानिक सोच आगे चलकर किसी आविष्कार, तकनीक या नए व्यवसाय की शुरुआत बन सकती है।
परंपरा को बचाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
किसी परंपरा को केवल इसलिए जीवित नहीं रखा जा सकता कि हमारे पूर्वज उसे मनाते थे। उसे अगली पीढ़ी के लिए अर्थपूर्ण बनाना पड़ता है। अगर युवा यह समझता है कि हरेली केवल पूजा का दिन नहीं बल्कि किसान, प्रकृति, मिट्टी, पानी और भोजन के बीच संबंध को समझने का अवसर है, तो वह इस परंपरा को अधिक गहराई से आगे ले जाएगा। और अगर वह इसी समझ को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ता है, तो वह परंपरा को केवल बचाएगा नहीं, उसे आगे बढ़ाएगा।
आज के युवा दिवस का असली सवाल
युवा दिवस पर युवाओं को यह कहना आसान है कि “आप देश का भविष्य हैं।”
लेकिन भविष्य केवल उम्र से नहीं बनता।भविष्य बनता है ज्ञान से, कौशल से, जिम्मेदारी से और समस्याओं को हल करने की क्षमता से। इसलिए आज का युवा अपने आसपास देखे और खुद से पूछे, मेरे गांव, शहर या समाज की ऐसी कौन-सी समस्या है जिसका समाधान मैं सीखकर कर सकता हूं? यह सवाल किसी भी बड़े करियर की शुरुआत हो सकता है।
हरेली और युवा दिवस हमें एक साथ क्या सिखाते हैं?
* हरेली हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है।
* युवा दिवस हमें अपने भविष्य की जिम्मेदारी याद दिलाता है।
* जड़ें हमें पहचान देती हैं और नई सोच हमें आगे बढ़ाती है।
इसलिए जरूरत न तो केवल पुरानी परंपराओं में अटके रहने की है और न ही आधुनिकता के नाम पर अपनी जड़ों को भूल जाने की। जरूरत है, परंपरा से सीख लेने की, विज्ञान से समाधान खोजने की और युवाओं की ऊर्जा से उसे जमीन पर उतारने की।
हरेली की हरियाली केवल खेतों में नहीं, हमारी सोच में भी दिखाई देनी चाहिए।
और युवा दिवस केवल युवाओं को बधाई देने का दिन नहीं, उन्हें जिम्मेदारी देने का दिन होना चाहिए। अगर हमारी नई पीढ़ी अपनी मिट्टी की समस्याओं को समझकर उनका आधुनिक समाधान खोजने लगे, तो यही परंपरा और आधुनिकता का सबसे सुंदर संगम होगा।




