भिलाई। 10 जनवरी, 2026, (सीजी संदेश ) : श्री गुरु सिंह सभा, सेक्टर-6, भिलाई में चल रहे चुनावी विवाद ने सिख समुदाय में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। एक पक्ष का दावा है कि 3 जून 2025 को संपन्न हुआ चुनाव विधिसम्मत और सर्वसम्मत था, जबकि विरोधी गुट द्वारा इसे चुनौती देते हुए नई चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, रजिस्ट्रार के एक आदेश की व्याख्या पर विवाद गहरा गया है, और मामला राज्य शासन के समक्ष अपील में विचाराधीन है।
श्री गुरु सिंह सभा के सदस्यों के अनुसार, विवाद की शुरुआत सरदार तारा सिंह द्वारा कथित रूप से आयोजित एक अवैध चुनाव से हुई, जिसमें उन्होंने खुद को अध्यक्ष घोषित कर अपने पुत्र मनजीत सिंह को गुरु नानक स्कूल का प्रभार सौंप दिया था। 100 से अधिक सदस्यों की शिकायत पर सहायक रजिस्ट्रार, दुर्ग ने इस प्रक्रिया को अमान्य ठहराते हुए नया और निष्पक्ष चुनाव कराने के आदेश दिए। जिला प्रशासन की देखरेख में पुलिस कंट्रोल रूम में बैठक हुई, जहां 10 सदस्यीय समिति गठित की गई और छत्तीसगढ़ सिख पंचायत को चुनाव संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। 3 जून 2025 को गुप्त मतदान के माध्यम से संपन्न चुनाव में सरदार गुरदेव सिंह का पैनल विजयी रहा, जबकि जी.एस. फ्लोरा पैनल पराजित हुआ। पराजित पक्ष ने परिणाम स्वीकार करते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और विजयी पक्ष को बधाई दी। सभी पक्षों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि चुनाव निष्पक्ष था और इसे किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाएगी। साथ ही, पराजित गुट ने नवगठित समिति को सहयोग देने का वादा किया। हालांकि, पराजित गुट ने इस फैसले का कथित रूप से उल्लंघन करते हुए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, जो खारिज हो गई। इसके बाद रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटीज के समक्ष अपील की गई, जहां सरदार तारा सिंह और जी.एस. फ्लोरा ने 6 अक्टूबर 2024 की अपनी समिति को बहाल करने और 3 जून 2025 के चुनाव को निरस्त करने की मांग की। रजिस्ट्रार ने एक आश्चर्यजनक आदेश पारित किया, जिसमें 2019 में गठित सरदार कुलवंत सिंह की समिति को चुनाव कराने का निर्देश दिया गया। गुरदेव सिंह पक्ष का आरोप है कि यह आदेश अपील में मांगी गई राहत से परे है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत, क्योंकि कुलवंत सिंह खुद अपीलकर्ता पक्ष से जुड़े हैं।
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरदेव सिंह, जसबीर सिंह चहल, अरविंदर सिंह खुराना और उनके पैनल के सदस्यों ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि इस आदेश के आधार पर सरदार कुलवंत सिंह ने एकतरफा चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया, जिसमें नामांकन 9 दिसंबर को लिया गया और चुनाव की तारीख राज्य शासन में अपील की अंतिम सुनवाई से ठीक एक दिन पहले रखी गई। गुरदेव सिंह पैनल के 18 उम्मीदवारों ने आपत्तियां दर्ज कराते हुए नामांकन जमा किया है। राज्य शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की तारीख 13 जनवरी 2026 तय की है और कुलवंत सिंह गुट को चुनाव स्थगित करने का अनुरोध किया गया है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया जारी रखी जा रही है। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा सदस्यता है। गुरदेव सिंह समिति ने पारदर्शिता के तहत 219 नए आजीवन सदस्य बनाए, जिनकी कुल सदस्य संख्या अब लगभग 455 है। सभा के उपनियमों के अनुसार, सदस्यता ग्रहण के 10 दिन बाद मतदान का अधिकार है। हालांकि, कुलवंत सिंह गुट का दावा है कि रजिस्ट्रार के आदेश के अनुसार केवल 2019 से पूर्व के सदस्य ही मतदाता होंगे, जबकि आदेश में ‘वैधानिक सदस्य’ शब्द का प्रयोग है, न कि किसी वर्ष की सीमा। गुरदेव सिंह पक्ष का कहना है कि यह व्याख्या गलत है और नए सदस्यों को वोट से वंचित करना मौलिक अधिकारों का हनन है। सिख समुदाय के सदस्यों का मानना है कि पिछले 20 वर्षों से कुलवंत सिंह और तारा सिंह गुट द्वारा गुरुद्वारा और स्कूल को निजी संपत्ति की तरह संचालित किया जा रहा था, जिससे आम संगत को सदस्यता से वंचित रखा गया। वर्तमान समिति का प्रयास है कि संचालन लोकतांत्रिक और पारदर्शी हो, जिसमें सभी सिखों की भागीदारी हो।
राज्य शासन की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि चुनाव प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। सिख संगठनों ने अपील की है कि प्रक्रिया निष्पक्ष और उपनियमों के अनुरूप हो, ताकि गुरुद्वारा की मूल भावना बनी रहे।
इस इस अवसर पर गुरु सिंह सभा के सदस्य बीबी श्रीमती कुलवंत कौर, मलकीत सिंह लल्लू , सुखबीर सिंह, चहल, जसबीर सिंह चहल, अरविंदर सिंह खुराना, सुखदेव सिंह, तेजपाल सिंह सतनाम सिंह पवन सिंह पवन संधू, तेजू सिंह, गुरनाम सिंह, सिकंदर सिंह, एचपीएस उप्पल, बलदेव सिंह, जसवंत सिंह, जसवीर सिंह कलेर सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।



