आज, 9 जनवरी 2026, भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के लिए गर्व तथा सम्मान का दिन है। प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas) का आयोजन देशभर में बड़े उत्साह और गौरव के साथ मनाया जा रहा है। यह दिवस उन करोड़ों भारतीयों की उपलब्धियों, योगदान और भारत से जुड़ी गहरी भावनात्मक जड़ों को सम्मानित करने का अवसर है जो अपनी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण से दुनिया के विभिन्न कोनों में भारतीय संस्कृति, विचार और प्रशंसा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भारत हर साल 9 जनवरी को ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ मनाता है। यह दिन महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका से वतन वापसी की याद दिलाता है। अपनी मिट्टी से दूर रहकर सात समंदर पार भी भारत का परचम लहराने वाले करोड़ों भारतीयों के सम्मान में आज ‘प्रवासी भारतीय दिवस’ मनाया जा रहा है। साल 2026 में भारत अपना 19वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन आयोजित कर रहा है। यह आयोजन न केवल प्रवासियों की उपलब्धियों का जश्न मनाने का जरिया है, बल्कि उनके ज्ञान, विशेषज्ञता और कौशल को देश के विकास के साथ जोड़ने का एक महत्वपूर्ण सेतु भी है। जानें इस दिन को दुनिया भर में कैसे मनाते हैं।
प्रवासी भारतीय दिवस का इतिहास
प्रवासी भारतीय दिवस की परंपरा की शुरुआत 2003 में हुई थी, जब भारत सरकार ने पहली बार इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया। यह दिवस हर साल 9 जनवरी को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 9 जनवरी 1915 को हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उनका यह वापस आना सिर्फ एक व्यक्ति की यात्रा नहीं थी, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदलने वाला एक ऐतिहासिक पल था। इस दिन गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा दी थी, जिसने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। इन सम्मेलनों के माध्यम से भारत सरकार प्रवासी भारतीयों और भारत के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित करने का प्रयास करती है। 2015 के बाद से इस कार्यक्रम को दो-वार्षिक (biannual) रूप में theme-based सम्मेलन के रूप में आयोजित किया जाता है, जिसमें विभिन्न देशों से आए विशेषज्ञ, नीति निर्माता और प्रवासी भारतीय भाग लेते हैं।
प्रवासी भारतीय दिवस का प्रमुख उद्देश्य
प्रवासी भारतीय दिवस का मुख्य उद्देश्य कई महत्वपूर्ण बातों को समर्पित करना है:
प्रवासी भारतीयों के योगदान को मान्यता देना: यह दिवस उन भारतीयों के योगदान को याद करता और सम्मानित करता है जिन्होंने विदेशों में रहकर भी भारत के विकास, समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को आगे बढ़ाया है।
भारत और प्रवासी समुदाय के बीच संवाद बढ़ाना: यह आयोजन एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहाँ न केवल अनुभव साझा किये जाते हैं, बल्कि भारतीय सरकार और प्रवासी समुदाय के बीच विचारों और नीतियों पर संवाद स्थापित होता है।
जड़ें और पहचान बनाए रखना: प्रवासी भारतीयों को उन्हें मूल देश से जोड़कर रखने, उनकी संस्कृति और पहचान के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर भी प्रदान करता है।
युवा पीढ़ी को प्रेरित करना: विदेशों में पली-बढ़ी अगली पीढ़ियों को भारतीय मूल, विचार और जिम्मेदारियों के प्रति जोड़ने के उद्देश्य से भी यह दिवस मनाया जाता है।
प्रवासी भारतीय दिवस का।महत्व और वैश्विक प्रभाव
प्रवासी भारतीय समुदाय दुनिया भर में अपनी उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। चाहे वह विज्ञान, शिक्षा, व्यापार, कला, सामाजिक कार्य, उद्यमिता या सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र हों। आज भारतीय विदेशों में शीर्ष पदों पर हैं, वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, शैक्षणिक अनुसंधान में भारी योगदान दे रहे हैं, और वैश्विक मंचों पर भारत का सम्मान बढ़ा रहे हैं। ऐसी उपलब्धियाँ केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि भारत की पहचान और भारतीय मूल्यों का विश्वव्यापी प्रसार भी हैं। प्रवासियों का आर्थिक योगदान भी महत्वपूर्ण है। वे निवेश, व्यापार, तकनीकी नवाचार तथा कौशल के माध्यम से भारत के विकास और वैश्विक समृद्धि में भूमिका निभाते हैं। इस योगदान से भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा मजबूत होती है और देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है।
मुख्य विशेषताएँ और आयोजन
प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान कई विशिष्ट कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं:
* सम्मेलन और सेमिनार: बड़े पैमाने पर आयोजित सम्मेलन में प्रवासी भारतीयों के अनुभव, चुनौतियों और योगदान पर जोर दिया जाता है, साथ ही साथ नीति निर्धारक, विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच बहस और विचार साझा किए जाते हैं।
* प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार: यह सम्मान उन प्रवासी भारतीयों और संगठनों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने शिक्षा, विज्ञान, व्यापार, कला, संस्कृति, सेवा और जनहित कार्यों में उत्कृष्ट योगदान किया है। यह पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मेलन के समापन सत्र में दिया जाता है।
* प्रवासी भारतीय दिवस की थीम-आधारित चर्चाएँ: हर दो-साल में आयोजित सम्मेलन किसी विशिष्ट थीम के अधीन होता है, जैसे “Diaspora: Reliable Partners for India’s Progress in Amrit Kaal” या “Diaspora’s Contribution to a Viksit Bharat” जैसी विषयवस्तु पर केंद्रित चर्चाएँ आयोजित की जाती हैं।
* नेटवर्किंग और अनुभव साझा करना: प्रवासी भारतीयों को नई पीढ़ी के साथ जुड़ने, सहयोग नेटवर्क विकसित करने और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अवसर तलाशने का अवसर मिलता है।
प्रवासी भारतीय दिवस का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
प्रवासी भारतीय दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है; यह पहचान, सम्मान और साझा ज़िम्मेदारी का प्रतीक भी है। यह दुनिया भर में बसे भारतीयों को अपने मूल देश से जुड़ने, अपनी संस्कृति बचाने और वैश्विक मंच पर भारत के गौरव को बढ़ाने का अवसर देता है। यह दिवस यह भी याद दिलाता है कि आज भारतीय माता-पिता, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक वैश्विक समुदाय के सदस्य हैं जो भारत की विरासत और विचारों को विश्व स्तर पर साझा करते हैं।
आज का प्रवासी भारतीय दिवस 2026 न केवल एक उत्सव है, बल्कि एक प्रेरणा भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सीमाएँ भौतिक होती हैं, पर भारतीय संस्कृति, मूल्यों और पहचान की कोई सीमा नहीं होती। प्रवासी भारतीय अपने क्षेत्र-क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं और नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। ऐसे में यह दिवस हमें उन सभी “गैर-निवासी भारतीयों (NRI)” और “भारतीय मूल के नागरिकों (PIO)” के संघर्ष, उपलब्धियों, योगदान और समर्पण को नमन करने का अवसर देता है।
हम सबको यह दिवस प्रेरणा दे कि चाहे हम जहाँ भी हों, भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, सम्मान और प्यार हमेशा सशक्त बना रहे। जय हिन्द!



