भारतीय सेना दिवस प्रति वर्ष 15 जनवरी को फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा द्वारा भारतीय सेना की कमान संभालने की ऐतिहासिक घटना का जश्न मनाता है, जो भारत की सैन्य संप्रभुता का प्रतीक है; यह ‘नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष’ थीम के साथ आधुनिक तकनीक और सूचना-केंद्रित युद्ध पर जोर देता है, जिसका उद्देश्य सैनिकों के बलिदान को सम्मानित करना और युवाओं को प्रेरित करना है, जिसमें मुख्य परेड जयपुर में आयोजित हो रही है।
हर साल 15 जनवरी का दिन भारत के लिए गर्व और वीरता का प्रतीक होता है. आज ही के दिन ‘भारतीय सेना दिवस’ मनाया जाता है. यह खास दिन उन वीर सैनिकों को समर्पित है, जो सीमाओं पर दिन-रात पहरा देकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. साल 2026 में भारत 78वां सेना दिवस मना रहा है. यह दिन न केवल सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का अवसर है, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण की याद भी दिलाता है, जब भारतीय सेना की कमान पहली बार एक भारतीय अधिकारी के हाथों में आई थी। 2026 में इंडियन आर्मी डे की थीम ‘नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष’ (Year of Networking and Data Centricity) है, जो आधुनिक युद्ध कौशल में तकनीक का महत्व दर्शाती है. सेना दिवस का मुख्य उद्देश्य उन शहीदों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. यह दिन देश के युवाओं को सेना में भर्ती होने और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित करने का सशक्त माध्यम है. इस साल के आयोजन की सबसे खास बात है कि मुख्य परेड को पारंपरिक छावनियों से बाहर निकालकर जनता के बीच लाया गया है।
भारतीय सेना दिवस का इतिहास
थल सेना के पुनर्गठन तथा के. एम. करिअप्पा के पहले कमांडर इन चीफ़ के रूप में पदग्रहण की वर्षगांठ को 15 जनवरी के दिन प्रत्येक वर्ष भारतीय थल सेना दिवस (Army Day) के रूप में मनाया जाता है।15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा ने ब्रिटिश जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला था। यह स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना के पूर्ण भारतीय नियंत्रण और सैन्य स्वायत्तता का प्रतीक था, जिसे सम्मानित करने के लिए यह दिन मनाया जाता है।15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के आखिरी शीर्ष कमांडर ‘जनरल फ्रांसिस बूचर‘ (General Francis Butcher) से यह पदभार ग्रहण किया और आजाद भारत के पहले थल सेना प्रमुख कमांडर बने।
फील्ड मार्शल केएम करियप्पा का योगदान
केएम करियप्पा (इन्हें प्यार से ‘किपर’ कहा जाता था) ने द्वितीय विश्व युद्ध और 1947 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया था. उन्होंने सेना को राजनीति से दूर रखने और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने ही नारा दिया था कि ‘सेना न हिंदू है, न मुस्लिम और न ही ईसाई; सेना सिर्फ भारतीय है.’ फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के नेतृत्व ने भारतीय सेना को अनुशासित और पेशेवर बल के रूप में स्थापित किया।
भारतीय सेना दिवस का महत्व
सैनिकों को सम्मान: यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्र के लिए बलिदान को नमन करता है।
प्रेरणा: यह देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा और सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है।
आधुनिकता का प्रदर्शन: यह सेना की तकनीकी प्रगति, जैसे मिसाइल शक्ति और AI-संचालित युद्ध क्षमताओं को प्रदर्शित करता है
आपदा प्रबंधन: सेना की मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों को भी उजागर किया जाता है।
भारतीय सेना दिवस का उद्देश्य
* सेना के वीर जवानों और शहीदों को श्रद्धांजलि देना।
* सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन करना।
* राष्ट्र के युवाओं में देशभक्ति और सेवा का भाव जगाना
* सेना और जनता के बीच जुड़ाव बढ़ाना, जैसा कि इस वर्ष परेड का जयपुर में आयोजन है।
भारतीय सेना दिवस 2026 की थीम
भारतीय सेवा दिवस 2026 की थीम है। “नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता का वर्ष (Year of Networking and Data Centricity)”. यह थीम भविष्य के युद्धों में प्रौद्योगिकी, सूचना और एकीकृत युद्ध प्रणालियों के महत्व पर जोर देती है।
जयपुर में 78वें सेना दिवस का भव्य आयोजन
साल 2026 में सेना दिवस की मुख्य परेड जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित की जा रही है. पहली बार मुख्य परेड किसी सैन्य क्षेत्र के बजाय सार्वजनिक मार्ग पर हो रही है. इससे आम नागरिक भी सेना का शौर्य करीब से देख सकेंगे. इस परेड में ‘भैरव बटालियन’ का डेब्यू और ‘अपाचे’ हेलीकॉप्टरों का फ्लाईपास्ट मुख्य आकर्षण हैं. साथ ही, स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल और पिनाका रॉकेट सिस्टम का प्रदर्शन भारत की ‘आत्मनिर्भर’ होती रक्षा शक्ति की गवाही दे रहा है।
भारतीय सेना दिवस 2026 के मुख्य आकर्षक
* मुख्य परेड और समारोह पहली बार दिल्ली के बाहर जयपुर में आयोजित किए जा रहे हैं।
* ‘भैरव बटालियन’ जैसी आधुनिक, तकनीक-सक्षम इकाइयों का प्रदर्शन, जो ड्रोन युद्ध और डिजिटल युद्ध के लिए तैयार हैं।
इंडियन आर्मी दिवस कैसे मनाया जाता हैं?
थल सेना दिवस का दिन दिल्ली के इंडिया गेट के समीप स्थित अमर जवान ज्योति के समक्ष भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि देकर मनाया जाता है, साथ ही इस दिन वीर शहीद सैनिकों की विधवाओं को सैन्य मेडल और कई दूसरे सम्मानों और पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। दिल्ली छावनी के करिअप्पा ग्राउंड में भारतीय सेना का शक्ति प्रदर्शन भी देखने को मिलता है और परेड का भी आयोजन किया जाता है जिसकी सलामी थल सेनाध्यक्ष लेते है। इस बार का सेना दिवस परेड बेंगलुरु में आयोजित की जाएगी। इसमें भारत की जल सेना, थल और वायु सेना के सर्वोच्च कमांडर, भारत के प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्री मंडल के सदस्य भी मौजूद होते हैं।
भारतीय सेना के बारे में रोचक तथ्य
थल सेना भारतीय सशस्त्र सेना बल की सबसे बड़ी टुकड़ी है जो धरातल से सीमा की सुरक्षा का काम करती है, इसका सेनापति भारत का राष्ट्रपति होता है।
सबसे बड़ी सेना: भारतीय सेना विश्व की तीसरी सबसे बड़ी सेना है, तथा भारतीय थल सेना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना के तौर पर जानी जाती हैं, इसकी गिनती दुनिया की सबसे आधुनिक सेनाओं में होती है।
ब्रिटिश इंडियन आर्मी: स्वतंत्रता से पहले इसे ब्रिटिश इंडियन आर्मी कहा जाता था, परंतु भारत की आज़ादी के बाद इसका पुनर्गठन कर इसे भारतीय थल सेना (इंडियन आर्मी) कर दिया गया।
स्थापना: इसकी स्थापना ब्रिटिश इंडियन आर्मी के रूप में 1 अप्रैल 1895 को हुई। तथा 15 जनवरी 1949 को इसे पुनर्स्थापित किया गया।
हाई अल्टीट्यूड वॉर: भारतीय सेना को High-Altitude युद्ध में महारत हासिल है, जिसका जीता जागता उदाहरण सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सेना के जवान हैं।आपको बता दें सियाचिन ग्लेशियर की समुंद्र तल से ऊंचाई 5000 मीटर है, यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध का मैदान माना जाता है।
बेस्ट ट्रेनिंग सेंटर: भारतीय सेना की ट्रेनिंग के लिए बनाया गया हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल (HAWS) दुनिया में सबसे बेस्ट ट्रेनिंग सेंटर में आता है।इस इंस्टिट्यूट में ट्रेनिंग लेने के लिए रूस और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) से जवान आते हैं, इन्हें पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाके में युद्ध की ट्रेनिंग प्रदान की जाती हैं।
मुख्यालय: भारतीय सेना का मुख्यालय (Headquarters) नई दिल्ली में स्थित है।
कमान: भारतीय सेना देशभर में सात कमानो में बाटी गई है जिनका मुख्यालय देश के अलग-अलग हिस्सों की अलग-अलग दिशाओं में है:
कमानमुख्यालय
1. केंद्रीय कमानलखनऊ
2. उत्तरी कमानउधमपुर
3. दक्षिणी कमानपुणे
4. दक्षिण पश्चिम कमानजयपुर
5. पूर्वी कमानकोलकाता
6. पश्चिमी कमानचंडी मंदिर
7. सेना ट्रेनिंग कमानशिमला
बड़े युद्ध: भारतीय सेना अब तक कुल 5 बड़े युद्ध कर चुकी है, जिसमें पाकिस्तान के साथ चार युद्ध और चीन के साथ एक युद्ध शामिल है।
अन्य कार्य: भारतीय सेना देश की हिफाज़त के साथ-साथ देश में प्राकृतिक आपदा, अशांति और दंगों की स्थिति में भी देश की सेवा करती है।
आदर्श वाक्य: थल सेना का आदर्श वाक्य ‘सर्विस बिफोर सेल्फ‘ (स्वपूर्ण सेवा) है।
यदि आप सच में Indian Army Day का सम्मान करना चाहते हैं, तो केवल संदेश फॉरवर्ड करने से आगे बढ़ें। कुछ मिनट निकालकर चुपचाप सैनिकों के प्रति कृतज्ञता महसूस करें, उनकी कहानियों के बारे में जानें और उनके मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की कोशिश करें। क्योंकि जब हर नागरिक Service Before Self की भावना के साथ जीता है, तो एक मज़बूत, सुरक्षित और एकजुट भारत का सपना वास्तविकता बनता है – और यही Indian Army Day की सच्ची भावना है।



