दुर्ग। 16 सितम्बर, 2025, (सीजी संदेश) : दुर्ग कलेक्टर जन दर्शन में निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा किए जा रहे, मनमानी एवं व्यवसायीकरण पर रोक लगाने, अभिभावकगण, समाजसेवी एवं जागरूक नागरिक मंच द्वारा अपर कलेक्टर योगिता देवांगन को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के नाम पर की जा रही लूट, मनमानी, और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की गई है। वर्तमान में निजी स्कूलों द्वारा निम्नलिखित समस्याएं आम हो चुकी हैं:
1. स्कूल प्रबंधन द्वारा अत्यधिक महंगी किताबें केवल एक ही दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
2. स्कूल ड्रेस, जूते, बेल्ट आदि की बिक्री भी केवल एक विशेष दुकान से अनिवार्य की जाती है, जिससे व्यापारिक लाभ उठाया जा रहा है।
3. हर साल किताबें बदल दी जाती हैं, जिससे पुराने किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों को हर वर्ष नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं।
4. मनमानी फीस वसूली की जा रही है, जिसमें कई बार ‘डेवेलपमेंट फीस’, ‘एक्टिविटी फीस’ जैसे नामों से अतिरिक्त राशि वसूली जाती है।
5. स्कूल प्रबंधन किताबें, ड्रेस, स्टेशनरी, जूते आदि की खरीदारी में कमीशन लेते हैं, जिससे यह शुद्ध रूप से एक व्यापार का रूप ले चुका है। शिक्षा के नाम पर कमीशन खोरी की जा रही है।
6. RTE (Right to Education) के तहत दाखिला पाए बच्चों को किताबें, ड्रेस, स्टेशनरी जैसी सुविधाएँ नहीं दी जातीं, जोकि कानूनन अनिवार्य हैं।
7. NCERT किताबों को लागू नहीं किया जाता, जबकि यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त हैं और लागत में भी सस्ती होती हैं।
अभिभावकों की मांगे :-
1. निजी स्कूलों द्वारा महंगी किताबों की अनिवार्यता और निर्धारित दुकानों से खरीद पर रोक लगाई जाए।
2. यूनिफॉर्म, जूते, बेल्ट आदि की खरीदारी में अभिभावकों को स्वतंत्रता दी जाए।
3. हर साल किताबें बदलने की प्रक्रिया पर नियंत्रण लगाया जाए।
4. फीस नियंत्रण हेतु “फीस नियामक आयोग” का गठन किया जाए।
5. शिक्षा में कमीशनखोरी और व्यापारीकरण पर रोक लगाने हेतु ठोस नियम बनाए जाएं।
6. RTE के तहत दाखिल बच्चों को मुफ्त किताबें व यूनिफॉर्म प्रदान की जाए।
7. सभी निजी स्कूलों में NCERT की किताबें अनिवार्य रूप से लागू की जाएं।



