भिलाई। 28 अक्टूबर, 2026, (सीजी संदेश) : श्रीशंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी एवं श्रीशंकराचार्य टेक्निकल कैंपस, जुनवानी, भिलाई के वार्षिक टेक्नो-कल्चरल एवं मैनेजमेंट फेस्ट ‘सम्विद 2026’ के अंतर्गत आयोजित मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) का समापन सत्र 25 अक्टूबर को संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन, संवाद, समस्या समाधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए बदलते समय की की चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा ने मॉडल यूनाइटेड नेशंस के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी देश की विरासत को आगे ले जाने की महत्वपूर्ण वपूर्ण जिम्मेदारी रखत म्मेदारी रखती है। युवाओं को को केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके समाधान खोजने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं में प्रश्न पूछने, तर्क करने और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की प्रवृत्ति विकसित होनी चाहिए। जिस प्रकार कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अपनी-अपनी भूमिकाओं के माध्यम से व्यवस्था का संचालन करती हैं, उसी प्रकार युवाओं को भी समस्याओं का विश्लेषण कर समाधान की दिशा में सोचने का अभ्यास करना चाहिए। श्री मिश्रा ने कहा कि जीवन में अनेक प्रकार के संघर्ष और चुनौतियां आती हैं। युवाओं को यह सीखना होगा कि कठिन परिस्थितियों का सामना कैसे किया जाए और उनसे निकलने का रास्ता कैसे खोजा जाए। उन्होंने नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के संदर्भ में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं के प्रयोग को महत्व देने की देने की आवश्यकता पर भी जोर को आधुनिक शिक्षा और वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़े रहना चाहिए। -2020) के संदर्भ में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं।
श्री गंगाजली एजुकेशनल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. जया मिश्रा ने अपने संबोधन में तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि कि अब बदलाव दशकों में नहीं, बल्कि कुछ ही सप्ताहों में दिखाई देने लगे हैं। ऐसे समय में परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना और नई चीजें सीखते रहना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विकास की प्रक्रिया को अनुकूलन की क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि मानव सभ्यता की विकास यात्रा भी समय और परिस्थितियों के अनुरूप बदलावों से होकर गुजरी है। मनुष्य ने अपनी समझ, अनुभव और क्षमताओं का विकास करते हुए वर्तमान उन्नत अवस्था तक की यात्रा तय की है। इसी प्रकार आज के युवाओं को भी बदलती परिस्थितियों को समझते हुए अपने ज्ञान और कौशल में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए। डॉ. जया मिश्रा ने युवाओं की शक्ति और उनकी संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कुलाधिपति आई.पी. मिश्रा के जीवन संघर्ष का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि एक छोटे से स्कूल से शुरुआत कर लगभग 22 हजार विद्यार्थियों तक विस्तारित शैक्षणिक संस्थान का निर्माण उनकी दूरदृष्टि, सोचने-समझने की क्षमता और निरंतर प्रयासों का उदाहरण है। यह यात्रा बताती है कि स्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के माध्यम से बड़े उद्देश्य हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे समय के साथ स्वयं को विकसित करें, चुनौतियों से सीखें और अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज के हित में करें।
कार्यक्रम में मॉडल यूनाइटेड नेशंस की आयोजन महासचिव नारायणी मिश्रा ने आयोजन के उद्देश्यों और विद्यार्थियों के लिए इसके महत्व को रेखांकित किया। मॉडल यूनाइटेड नेशंस के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, कूटनीतिक प्रक्रियाओं, विभिन्न देशों के दृष्टिकोण और वैश्विक समस्याओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला। सम्विद 2026 की थीम ‘कनेक्टिंग माइंड, क्रिएटिंग फ्यूचर’ के अनुरूप आयोजित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को स्वतंत्र चिंतन, प्रभावी संवाद, तार्किक बहस और सामूहिक समाधान की प्रक्रिया से जुड़ने का मंच प्रदान किया। इस प्रकार का अनुभव विद्यार्थियों को भविष्य में नेतृत्व और निर्णय संबंधी जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार करने में सहायक है।
विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. स्मिता सेलट ने कहा कि आज की नई पीढ़ी प्रतिभाशाली और बुद्धिमान है। युवा समस्याओं को पहचानने के साथ-साथ उनके समाधान खोजने की दिशा में भी स्वतंत्र रूप से सोच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और सामूहिक निर्णय लेने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने मॉडल यूनाइटेड नेशंस जैसी गतिविधियों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और तार्किक चिंतन को मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
एसएसटीसी के डायरेक्टर डॉ. पी.बी. देशमुख ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन में संवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रभावी संवाद के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि परिवार और समाज से जुड़ी समस्याओं को समझने तथा उनका समाधान खोजने में भी सहायता मिलती है।
समापन सत्र ने यह संदेश दिया कि युवाओं के लिए शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रश्न पूछने, समस्याओं का समाधान खोजने, संवाद के माध्यम से मतभेदों को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता विकसित करना भी है। आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलन और संघर्षों का सामना करने का साहस ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बना सकता है। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


