भिलाई। 14 अक्टूबर, 2026, (सीजी संदेश) : भारतीय जनता पार्टी के नेता एवं छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के पूर्व सदस्य विजय साहू ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट कांग्रेस और विपक्ष द्वारा भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर किए जा रहे नकारात्मक दावों पर करारा तमाचा है। जब दुनिया की प्रतिष्ठित आर्थिक संस्थाएं भारत की विकास संभावनाओं को लेकर अपना अनुमान बढ़ा रही हैं, तब कांग्रेस और विपक्ष को भी अपने आरोपों की समीक्षा करनी चाहिए।
श्री साहू ने कहा कि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की अनुमानित विकास दर 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दी है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विकास दर का अनुमान 7.1 प्रतिशत किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के लिए इस प्रकार के सकारात्मक अनुमान उत्साहजनक हैं। आईएमएफ ने मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की गतिविधियों और आर्थिक सुधारों को भारत की विकास संभावनाओं के प्रमुख आधारों में शामिल किया है।
कांग्रेस एवं विपक्ष पर व्यंग्य करते हुए श्री साहू ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस के कुछ नेताओं की परेशानी यह है कि वे देश की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हैं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की विकास दर के अनुमान बढ़ा देती हैं। अब शायद कांग्रेस की अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल सरकार से नहीं, बल्कि आईएमएफ से होगा कि आखिर आपको भारत की तरक्की दिखाई कैसे दे रही है? उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन सवाल तथ्यों और ठोस आंकड़ों पर आधारित होने चाहिए। केवल राजनीतिक विरोध के लिए देश की आर्थिक उपलब्धियों को नकारना उचित नहीं है।
श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आर्थिक सुधारों, अधोसंरचना विकास, निवेश और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कार्य कर रही है। आईएमएफ का संशोधित अनुमान भारत की आर्थिक संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ रोजगार, महंगाई और आम नागरिकों की आय जैसे विषयों पर भी निरंतर काम करना आवश्यक है। देशहित के मुद्दों पर विपक्ष को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यपूर्ण और रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए।



