दुर्ग। 12 अक्टूबर, 2026, (सीजी संदेश) : स्वस्थ मन, सुरक्षित बचपन और अधिकारों के प्रति जागरूक युवा—एक सशक्त समाज की नींव इन्हीं से बनती है। इसी सोच के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के समन्वय में आयोजित इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा के अधिकार, साइबर सुरक्षा और निःशुल्क विधिक सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया।
पीएम श्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आयोजित शिविर का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपने मन की बात कहने का भरोसा देना, दूसरों की परेशानियों को समझने की संवेदनशीलता विकसित करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना भी था।
कार्यक्रम में तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री यशवंत कुमार सारथी तथा अष्टम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री पुरुषोत्तम सिंह मरकाम ने विद्यार्थियों से संवाद किया।
मानसिक स्वास्थ्य: चुप्पी नहीं, संवाद है समाधान
विद्यार्थियों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। पढ़ाई का दबाव, परीक्षा की चिंता, असफलता का डर और व्यक्तिगत परेशानियां किसी भी विद्यार्थी को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थितियों में स्वयं को अकेला समझने या परेशानी को छिपाने के बजाय परिवार, मित्रों अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करना और आवश्यकता पड़ने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के प्रमुख प्रावधानों के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों और सम्मानजनक व्यवहार के महत्व से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में NALSA की Legal Services to Persons with Mental Illness & Persons with Intellectual Disabilities Scheme, 2024 के संबंध में भी जानकारी दी गई। इसके माध्यम से मानसिक बीमारी तथा बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों, संरक्षण और निःशुल्क विधिक सहायता की उपलब्धता के बारे में समझाया गया।
शिक्षा का अधिकार: हर बच्चे के सपनों तक पहुंचने का रास्ता
जागरूकता सत्र में शिक्षा को केवल विद्यालय तक सीमित विषय न मानकर बच्चों के भविष्य और समान अवसरों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों को NALSA SHIKSHA SCHEME, 2026 तथा निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के संबंध में जानकारी देकर सरल भाषा में समझाया गया कि शिक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधान बच्चों के अवसरों, समावेशन और शैक्षणिक अधिकारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं।
डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सुरक्षा
ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर सुरक्षा भी जागरूकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। विद्यार्थियों को अनजान लिंक, फर्जी संदेश, ऑनलाइन ठगी और ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों का परिचय देते हुए OTP, बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी और व्यक्तिगत डिजिटल विवरण किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करने की समझाइश दी गई।
करियर के संबंध में मार्गदर्शन
शिविर का एक महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों और न्यायाधीशों के बीच हुआ सीधा संवाद रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न कानूनी और सामाजिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका न्यायाधीशगण ने सरल और सहज भाषा में समाधान किया। विद्यार्थियों को करियर निर्माण, शिक्षा, अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास के महत्व पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
एक विद्यालय से पूरे जिले तक पहुंचा जागरूकता का संदेश
DLSA दुर्ग की इस पहल का दायरा विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अध्यक्ष श्री के० विनोद कुजूर के मार्गदर्शन एवं सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा विद्यालय स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ जिले के विभिन्न गांवों और जनसामान्य के बीच भी जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं। पैरालीगल वॉलंटियर्स (PLVs) के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, शिक्षा के अधिकार तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाए गए।
इस अभियान में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सहित विभिन्न आयु वर्गों के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक परेशानियों के प्रति संवेदनशीलता तथा जरूरतमंद व्यक्तियों के साथ सहयोगपूर्ण व्यवहार के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही साइबर फ्रॉड से बचाव, शिक्षा के अधिकार, NALSA SHIKSHA SCHEME, 2026 और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित जानकारी भी साझा की गई।
नागरिकों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर वे संबंधित विधिक सेवा संस्थाओं से संपर्क कर सकते हैं और निःशुल्क विधिक सहायता के लिए NALSA की हेल्पलाइन 15100 का उपयोग कर सकते हैं।



