भिलाई। 08 जून, 2026, (सीजी संदेश) : गुरु घासीदास सेवा समिति, सेक्टर-6, भिलाई द्वारा आज सतनाम भवन में एक दिवसीय सामाजिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सुबह 10:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक चले इस वैचारिक समागम में दुर्ग जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आए सतनामी समाज के प्रमुखों, भंडारी, साटीदार, पंच-सरपंच, और विभिन्न समितियों के अध्यक्षों व पदाधिकारियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। दीप प्रज्वलन और गुरु आरती से हुई शुरुआतकार्यक्रम का शुभारंभ भजन मंडली के साथियों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सतनाम भजनों के साथ हुआ। तत्पश्चात अतिथियों का आगमन हुआ, जिन्होंने बाबा गुरु घासीदास के तैलचित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी की विधिवत शुरुआत की। इसके बाद भजन मंडली और उपस्थित समस्त संत समाज ने मिलकर सामूहिक गुरु आरती की, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्य अतिथि राज महंत डोमन लाल कोसेवाड़ा (विधायक – अहिवारा विधानसभा क्षेत्र एवं उपाध्यक्ष – अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ शासन) रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरु घासीदास सेवा समिति सेक्टर-6 के अध्यक्ष बी.एल. कुर्रे ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज रायपुर के अध्यक्ष एल.एल. कोसले, सतनामी कल्याण आश्रम दुर्ग के अध्यक्ष चंद्रशेखर बंजारे, सतनामी समाज राजनांदगांव के अध्यक्ष युवराज ढीढी, सतनामी समाज जिला बालोद के अध्यक्ष संजय बारले और सतनाम युवा संगठन मुरमुंदा परिक्षेत्र के अध्यक्ष रामस्वरूप चतुर्वेदी विशेष रूप से मंच पर आसीन रहे। परंपरा के अनुसार, गुरु घासीदास सेवा समिति द्वारा कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि, अध्यक्ष और सभी विशिष्ट अतिथियों का सफेद गमछा ओढ़ाकर और श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत व सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि राज महंत डोमन लाल कोसेवाड़ा ने कहा कि समाज का असली विकास बाबा गुरु घासीदास के संदेशों को जीवन में उतारने से ही संभव है। उन्होंने शिक्षा और मजबूत संस्कारों को समाज की सबसे बड़ी जरूरत बताया। श्री कोसेवाड़ा ने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए समाज के प्रबुद्ध जनों से अपील की कि वे जन्म से लेकर मृत्यु तक के सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में सादगी अपनाएं। दिखावे और फिजूलखर्ची को रोककर उस धन का उपयोग बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उच्च शिक्षा के लिए करें, तभी समाज सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा।
27 बिंदुओं पर गहन चिंतन और लिखित विचार संकलन
संगोष्ठी के दौरान समाज के उत्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण 27 बिंदुओं पर विशेष चर्चा की गई। इसमें सामाजिक एकता, अखंडता, शिक्षा के स्तर को सुधारने और रीति-रिवाजों को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। समिति द्वारा निवेदन किया गया कि सुख और दुख के हर कार्यक्रम को बिना तड़क-भड़क के, सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न किया जाए। इस पहल की सराहना करते हुए उपस्थित संत समाज और सामाजिक प्रतिनिधियों ने अपने मूल्यवान सुझाव लिखित रूप में समिति को सौंपे। सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन इस सफल और सार्थक आयोजन का मंच संचालन समिति के महासचिव एन.आर. गिलहरे ने किया। कार्यक्रम के स्वागत भाषण टेकराम बंजारे व अंत में उपस्थित सभी अतिथियों, संत समाज और स्वजातीय बंधुओं के प्रति आभार प्रदर्शन कार्यकारिणी सदस्य सम्भू लाल डहरिया द्वारा व्यक्त किया गया।




