आज देशभर में रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन अयोध्या के राजा दशरथ के घर पर श्री राम का जन्म हुआ था। इसी के कारण हर साल इस दिन उन्के जन्मोत्सव को रामनवमी के रूप में मनाते हैं। अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम का सूर्य तिलक किया जाएगा। इसके अलावा देशभर के अन्य मंदिरों में भी धूमधाम से श्री राम की पूजा-अर्चना की जाएगी। पंचांग के अनुसारइस साल,, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी. राम नवमी का मध्याह्न काल 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 54 मिनट के बीच होगा. रामनवमी पर काफी शुभ योग बन रहे हैं। इस योगों में श्री राम की पूजा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होगी। आइए जानते हैं रामनवमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र सहित अन्य जानकारी…
भारत सांस्कृतिक और त्योहारों का देश है जहां पर किसी ना किसी त्यौहार की रौनक सदैव लगी रहती है. आज हम बात कर रहे हैं भारत के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के बारे में. जैसा आप जानते ही हैं। हर साल रामनवमी का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, लेकिन इस बार तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम बना हुआ है. मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं और उनका जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को मध्यान्ह यानी दोपहर के समय हुआ था. अगर तिथि की बात करें तो इस बार नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च को सुबह करीब 10 बजकर 48 बजे से हो रही है और यह 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, वैष्णव राम नवमी शुक्रवार, 27 मार्च, को मनाई जानी चाहिए, लेकिन श्रीराम के जन्म का समय मध्यान्ह में होने के कारण कई परंपराओं में 26 मार्च को भी राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा. ऐसे में दोनों दिन ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और शुभ माने गए हैं। यह शुभ अवसर भक्तों को भगवान राम की शिक्षाओं, मूल्यों और आदर्शों का सम्मान करने के लिए एकजुट करता है। इतिहास काल से ही यह पावन दिन भारत के हिंदु संप्रदाय द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है. आज हम इस त्यौहार के बारे में कुछ महत्वपूर्ण, अनसुनी और अनकही बातें बताने जा रहे हैं. तो चलिए भगवान राम का नाम लेते हैं और आरंभ करते हैं भगवान राम की उस ऐतिहासिक गाथा के बारे में….
कौन थे भगवान राम?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि भगवान विष्णु सातवें अवतार थे. भगवान विष्णु ने भगवान राम के रूप में अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लिया था. भगवान राम राजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे और उनकी पहली पत्नी कौशल्या के पुत्र थे।
2026 में कब मनाई जाएगी रामनवमी अगर तिथि की बात करें तो इस बार नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च को सुबह करीब 10 बजकर 48 बजे से हो रही है और यह 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, रामनवमी 27 मार्च को मनाई जानी चाहिए, लेकिन श्रीराम के जन्म का समय मध्यान्ह में होने के कारण कई परंपराओं में 26 मार्च यानी आज भी राम जन्मोत्सव मनाया जाएगा. दोनों दिन ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और शुभ माने जा रहे हैं. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 27 मार्च 2026 को राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जाएगा।
राम नवमी पूजा मुहूर्त 2026
27 मार्च 2026 को राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा। तो वहीं राम नवमी मध्याह्न का क्षण दोपहर 12:27 बजे का है।
राम नवमी 2026 शुभ मुहूर्त
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 13 मिनट से 01 बजकर 41 मिनट
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 30 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
अमृत काल- 01 बजकर 05 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक
आप अपना शुभ समय चुन सकते हैं, और फिर अपनी पूजा शुरू कर सकते हैं। ये है राम नवमी की पूजा विधि-
* मंदिर या पूजा क्षेत्र की सफाई से शुरुआत करें। मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाएं। भगवान राम की मूर्ति का चित्र लगाएं.
* अब कलश स्थापना करें. एक कलश में जल भरें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें।
* भगवान राम की मूर्ति या तस्वीर को दूध, दही, शहद, घी और चीनी के मिश्रण से पंचामृत से स्नान कराकर अपनी पूजा शुरू करें। मूर्ति या तस्वीर को स्नान कराते समय मंत्र का जाप करें।
* मूर्ति को साफ करके यथा स्थान पर रखें।
* भगवान राम को तुलसी के पत्तों के साथ फूल, फल, मिठाई आदि अर्पित करें।
* आरती का समय. दीपक जलाएं और भगवान राम की आरती गाएं। भगवान राम की स्तुति में एक आरती गीत गाएं और शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए उनका आशीर्वाद मांगें।
* अंत में भगवान राम को अर्पित प्रसाद को परिवार के सदस्यों या भक्तों में बांट दें। प्रसाद का सेवन करना शुभ माना जाता है और इससे दैवीय आशीर्वाद मिलता है।
अयोध्या में इस बार रामनवमी होगी बेहद खास
अयोध्या में इस बार की रामनवमी बेहद ही खास है, क्योंकि ये पहला अवसर है जब इस दिन राम मंदिर में रामलला मौजूद है. जिसकी वजह से लाखों लोग इस मौके पर रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंच रहे हैं. राम मंदिर के पट्ट 24 घंटे के लिए खुले हुए हैं. दिन हो या फिर रात की आरती के समय हो यह फिर भोग राग हर समय राम भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर पा रहे है. ऐसा इसलिए हो रहा है कि ज्यादा भीड़भाड़ की वजह से भगदड़ ना मचे. अगर आवश्यकता हुई तो रामनवमी के अगले दिन भी राम मंदिर को 24 घंटे खोलने को लेकर विचार किया जाएगा. वहीं श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन के साथ शासन की वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार बैठक कर तैयारी की समीक्षा कर रहे हैं. अयोध्या में कड़ी सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं।
कैसी चल रही है तैयारियां?
मंदिर के जन्मभूमि पथ से लेकर गर्भगृह तक हर तरफ फूलों की सजावट की गई है. इसके अलावा रात की चांदनी के साथ मंदिर सुंदर लाइट्स से भी जगमगाएगा. इस दिन रामलला के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होंगे. रामनवमी के दिन मंदिर के परिसर में मशहूर कलाकारों के द्वारा गीत, संगीत और बधाई गीतों का आयोजन भी किया गया है. इस दिन भक्त सुबह 4 बजे से रात के 11 बजे तक राम लला के दर्शन कर पाएंगे।
कब होगा सूर्य तिलक?
बताया जा रहा है कि रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा, इस समय को अभिजीत मुहूर्त बताया गया है. वाल्मीकि रामायण के मुताबिक त्रेतायुग में इसी समय रामलला का जन्म हुआ था. वैज्ञानिकों ने दर्पन के जरिए रामलला के मस्तक तक सूर्य की किरणें पहुंचाई है. सूर्य की किरण लगभग 4 मिनट तक रामलला के ललाट की शोभा बढ़ाएंगी।
रामनवमी भोग
रामनवमी के खास मौके पर भगवान राम की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इन चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसलिए प्रभु श्री राम को केसर भात, चावल की खीर, पीली रंग की मिठाई, कंदमूल, बेर आदि का भोग लगाएं।
श्री राम मंत्र
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे, रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नमः ||
ॐ क्लीं नमो भगवते रामचन्द्राय सकलजन वश्यकराय स्वाह: ||
श्री राम गायत्री मंत्र
ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि, तन्नो राम प्रचोदयात्॥
कोदण्ड राम मंत्र
श्री राम जय राम कोदण्ड राम॥
राम रक्षा स्तोत्र
विनियोग
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप् छंदः। सीता शक्तिः। श्रीमान हनुमान् कीलकम् । श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ।
रामनवमी का महत्व
राम नवमी का त्योहार हर साल बड़े ही उत्साह और भक्तिभाव के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम विष्णु के सातवें अवतार के रूप में जन्म लिया था। वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ के यहां बड़े पुत्र के रूप में लिया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार राम का जन्म रावण के वध के लिए हुआ था। इस कारण से हर साल राम नवमी का पर्व भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम मानवीय रूप में एक ऐसा अवतार था जो पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग संदेश देते हैं और साथ ही उनकी आत्मा को पूरी तरह से पवित्र करने का काम करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार राम नवमी का त्योहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है और यह चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन भी होता है। पूरे देश में इस दिन शक्ति की आराधना के साथ राम नवमी का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा जाता है। देशभर इस दिन जगह-जगह धार्मिक जुलूस भी निकाले जाते हैं। राम नवमी के दिन मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस पूरे दिन उपवास रखकर मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन से सीख लिया जाता है। सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करते हुए समापन किया जाता है।
कैसे मनाया जाता है रामनवमी का पर्व?
रामनवमी का यह पावन त्योहार भारत देश में प्रत्येक हिंदू परिवार द्वारा मनाया जाता है. प्रत्येक हिंदू परिवार में इस दिन व्रत-उपवास, पूजा पाठ, बड़े बड़े धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. बड़े पैमाने पर भगवान राम का जन्मोत्सव देश के अलग-अलग जगहों पर आयोजित किया जाता है और साथ ही सभी मंदिरों में बड़े पैमाने पर सात सज्जा भी की जाती है. राम नवमी के पावन दिन पर प्रत्येक हिंदू परिवार अपने घरों को साफ करने के बाद वहां पर पवित्र कलश स्थापित करते हैं और भगवान राम का पूजन वंदन करके भजन कीर्तन करके अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं. मुख्य रूप से भगवान राम के साथ इस दिन माता जानकी और भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण की भी पूजा की जाती है. रामनवमी का यह पावन त्यौहार माता रानी के नवरात्रि के नौवें दिन मनाया जाता है ऐसे में बहुत से भक्त ऐसे होते हैं जो पूरे 9 दिन का उपवास बहुत ही श्रद्धा पूर्वक रखते हैं. रामनवमी के आरंभ होते ही राम भक्त सुबह उठते ही सूर्य भगवान को जल चढ़ा कर सूर्य नमस्कार करते हैं. वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए ही साधु जन इस दिन भगवान राम का स्मरण करते हुए व्यतीत करते हैं।
क्यों लिया भगवान ने धरती पर जन्म?
पौराणिक कथाओं के अनुसार धरती पर जब भी पाप का प्रभाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है तब भगवान धरती पर प्रकट होते हैं और उस पाप का समूल विनाश करते हैं. एक ऐसे ही विशेष कारण की वजह से भगवान राम का प्राकट्य इस धरती पर हुआ था. हमारे ग्रंथ बताते हैं कि धरती पर रावण का प्रकोप और अत्याचार बहुत ज्यादा बढ़ गया था जिसकी वजह से भगवान राम ने रावण के विनाश के लिए ही धरती पर प्रकट होकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका अदा की थी।
भगवान राम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण की पूजा क्यों की जाती है?
आपने अक्सर भगवान राम की मूर्ति के साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण और उनकी पत्नी माता जानकी की भी तस्वीर देखी होगी. अक्सर इसे राम परिवार का नाम दिया जाता है और इन सबकी एक साथ पूजा की जाती है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों? तो चलिए हम बताते हैं:-
ग्रंथों के अनुसार भगवान राम की सहायता के लिए ही उनके छोटे भाई लक्ष्मण का अवतार भी इस धरती पर हुआ था. ग्रंथों के अनुसार लक्ष्मण शेषनाग है जिस पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं. सरल शब्दों में कहें तो शेषनाग ही थे जो लक्ष्मण के अवतार में भगवान राम के छोटे भाई बनकर पृथ्वी पर प्रकट हुए. आपने भगवान राम की कथा तो सुनी होगी जिसमें बताया जाता है कि माता कैकई के वरदान की वजह से भगवान राम को अयोध्या का राजपाट छोड़कर 14 वर्षों की लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से वनवास ग्रहण करना पड़ा था. उस वनवास के दौरान भगवान राम का साथ उनकी पत्नी माता जानकी और उनके छोटे भाई लक्ष्मण ने दिया था. भगवान की इस वनवास यात्रा के दौरान भगवान राम ने पृथ्वी पर मौजूद बहुत सारे असुरों का संहार किया था. इसी अवधि के दौरान भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर अहंकारी रावण अभी संहार कर डाला था और इस पृथ्वी को पाप मुक्त कर दिया था. 14 वर्ष के लंबे वनवास के बाद भगवान राम और लक्ष्मण और सीता माता अपनी वनवास की अवधि को पूरा करने के बाद वापस अयोध्या लौटे थे जिसके बाद से ही उन तीनों की पूजा एक साथ होने लगी।
भारत के विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न तरीके से मनाई जाती है रामनवमी
भारत विविधताओं से भरपूर एक ऐसा देश है जहां पर प्रत्येक त्योहारों को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है. ठीक इसी प्रकार रामनवमी को मनाने का भी भारत के प्रत्येक प्रदेश का एक अलग अपना अनोखा तरीका है. जैसे:-
* उत्तर प्रदेश में मौजूद अयोध्या शहर, भद्राचलम (तेलंगाना), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और बिहार के सीतामढ़ी सहित इन स्थानों पर भगवान के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर बड़े पैमाने पर रथ यात्रा आयोजित की जाती है।
* कर्नाटक में भी यह एक ऐसा महत्वपूर्ण त्योहार है जिस पर भक्तों द्वारा मुफ्त में कस्तूरी का रस और गुड़ भंडारे के रूप में बांटा जाता है।
* बेंगलुरु में श्री राम सेवा मंडली आरसीटी चामराजपेट द्वारा लगभग 1 महीने तक शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन कराया जाता है. यह एक ऐसा आयोजन होता है जो बेंगलुरु और कर्नाटक के लिए अविस्मरणीय उत्सव होता है।
* भारत पूर्ववर्ती हिस्से के उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित सभी प्रदेशों में रामनवमी के त्योहार को एक ऐसा वार्षिक त्योहार के रूप में मनाया जाता है जिसमें वहां पर मौजूद सभी जगन्नाथ मंदिरों से भगवान जगन्नाथ को निकाल कर बहुत बड़ी रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है जो उन प्रदेशों के कई सारे क्षेत्रों में घूमते हुए भक्तों की टोलीओं के साथ नाचते गाते हुए भगवान का जन्म दिवस मनाते हैं।
* भारत के प्रत्येक इस्कॉन मंदिर से जुड़े भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और धूमधाम के साथ नाच गाना करते हुए इस पवित्र त्यौहार को मनाते हैं।
* चैत्र मास की नवरात्रि के दौरान देश भर एक कई प्रदेशों में रामनवमी के सुनहरे अवसर पर विभिन्न प्रकार के मेलों का भी आयोजन किया जाता है जिनमें लाखों लोग सम्मिलित होते हैं।
भारत के बाहर भी मनाया जाता है रामनवमी का पावन त्यौहार
भारत में ही नहीं बल्कि भारत के समेत कुछ विदेशी देशों में भी रामनवमी का यह पावन त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।भारतीय गिरमिटिया सेवकों के जो वंशज 1910 से पहले औपनिवेशिक दक्षिण अफ्रीका में रहने लगे थे वह दक्षिण अफ्रीका के बागानों और खानों में काम करने के लिए वहां पर गए थे। उनकी वजह से दक्षिण अफ्रीका में प्रत्येक वर्ष रामायण का पाठ किया जाता है और भजन गाए जाते हैं इस प्रकार वे रामनवमी का पावन त्यौहार वहां पर मनाते हैं। इसके अलावा त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना, सुरीनाम, जमैका, कैरेबियाई, मॉरीशस और मलेशिया के साथ-साथ सिंगापुर में भी रहने वाले सभी प्रकार के हिंदुओं द्वारा यह त्योहार पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। फिजी में भी यह त्यौहार हिंदुओं द्वारा बहुत ही धूमधाम के साथ प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है जिसमें सीधी में रहने वाले सैकड़ों हिंदू शामिल होते हैं। प्रत्येक वर्ष भगवान राम का यह जन्म दिवस पूरे भारत वासियों के लिए बहुत ज्यादा हर्षोल्लास लेकर आता है जिसे भारत का प्रत्येक भक्त बहुत ज्यादा भक्ति भाव के साथ मनाता है और भगवान को याद करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं. इस बार कोरोना वायरस के चलते इस त्यौहार में ज्यादा हर्षोल्लास तो नहीं होगा परंतु भक्ति में कमी बिल्कुल भी नहीं आएगी भारत की जनता अपने घरों में बैठकर ही भगवान का धन्यवाद करते हुए इस त्यौहार को धूमधाम और भक्ति भाव से मनाएंगे।
राम नवमी अनुष्ठान
राम नवमी हिंदू धर्म में एक बहुत ही शुभ त्योहार है। यह भक्तों के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। अलग-अलग लोगों द्वारा कई अनुष्ठान किए जाते हैं। यहां कुछ सामान्य राम नवमी अनुष्ठानों की सूची दी गई है-
अनुष्ठान स्नान: कई लोग अपने दिन की शुरुआत पवित्र नदियों या जल में अनुष्ठान स्नान करके करते हैं। यह भगवान राम को समर्पित करने से पहले शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रतीक है। स्नान का कार्य आध्यात्मिक महत्व रखता है और माना जाता है कि इससे व्यक्ति के पाप और अशुद्धियाँ साफ हो जाती हैं। राम नवमी अपने पापों को धोने का सबसे अच्छा दिन है।
पूजा और अभिषेक: भगवान राम के मंदिर में विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है। इस प्रक्रिया में, भगवान राम की मूर्ति को मंत्रों के साथ दूध, शहद, दही, घी और पानी से स्नान कराया जाता है। इसी तरह, वे मूर्ति की सफाई करते हैं और इसे भगवान राम का पुनर्जन्म मानते हैं।
प्रसाद: राम नवमी के दिन लोग मंदिरों में जाते हैं और भगवान राम को फूल, भोजन, फल, मिठाइयाँ और अन्य पारंपरिक व्यंजन चढ़ाते हैं। यह भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। लोग भगवान राम को प्रभावित कर आशीर्वाद मांगते हैं।
राम लीला प्रदर्शन: कई मंदिरों में, राम नवमी के उत्सव के रूप में राम लीला प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। यह लोगों द्वारा किया जाने वाला एक प्रदर्शन है जहां वे रामायण के दृश्यों को फिर से बनाते हैं। यह ज्यादातर मंदिर या सामुदायिक हॉल में आयोजित किया जाता है। वे भगवान राम के दिव्य गुणों और शिक्षाओं की समझ को गहरा करने के लिए रामायण पाठ की व्याख्या और व्याख्या करते हैं।
भजन और कीर्तन: भगवान राम की स्तुति करने के लिए लोग अपने घरों या मंदिरों में भजन और कीर्तन का आयोजन करते हैं। लोग भगवान राम की मूर्ति के सामने भक्ति गीत, भजन और कीर्तन करके अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। सकारात्मकता लाने के लिए यह बहुत ही शांत वातावरण है।
प्रसाद वितरण: लोग भगवान राम को भोजन, मिठाई और फल चढ़ाते हैं और बाद में इस प्रसाद को लोगों में वितरित करते हैं।
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