जैसे ही महाशिवरात्रि का पावन पर्व करीब आता है, हमारी आत्मा में एक अद्भुत ऊर्जा, शांति और पवित्रता का संचार होता है। यह पर्व भगवान शिव, परमेश्वर, महाकाल, भोलेनाथ, की असीम कृपा और दिव्य प्रेम का प्रतीक है। इस रात भगवान शिव ने शक्ति माता पार्वती के साथ दिव्य मिलन किया था, जिससे संसार में सृष्टि, संहार और पुनरुत्थान की अनंत प्रक्रियाएँ चलती हैं।
आज देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व गहरी श्रद्धा, आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्योतिषीय शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाला यह महापर्व भगवान शिव की आराधना, तप, जागरण और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में शिव-शक्ति का दिव्य मिलन हुआ था, जिसने सृष्टि के संतुलन को नई दिशा दी। मंदिरों में रुद्राभिषेक, घर-घर शिवपूजन, रात्रि जागरण और मंत्रजाप की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं।
आस्था का इतिहास और महत्व
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और साधना की रात है। पुराणों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग स्वरूप में भगवान शिव का अवतरण हुआ। शिव को संहार और पुनर्निर्माण दोनों का अधिपति माना गया है—वे अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। इसलिए यह पर्व व्रत, संयम और ध्यान के माध्यम से मन-वचन-कर्म की शुद्धि का संदेश देता है। भक्तों का विश्वास है कि इस रात की गई सच्ची उपासना से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, रोग-कष्ट घटते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि 2026: तिथि और प्रमुख समय
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी की शाम से होकर 16 फरवरी की शाम तक रहेगा। परंपरा के अनुसार, रात्रि में चार प्रहरों में शिवपूजन का विशेष महत्व है।
निशिता काल (अत्यंत फलदायी समय):
रात्रि लगभग 12:09 बजे से 1:01 बजे (16 फरवरी)
इस अवधि में किया गया अभिषेक, मंत्रजाप और ध्यान विशेष फलदायी माना गया है।
चार प्रहर पूजा (अनुमानित):
प्रथम प्रहर: संध्या के बाद
द्वितीय प्रहर: रात्रि मध्य से पूर्व
तृतीय प्रहर: मध्यरात्रि पश्चात
चतुर्थ प्रहर: ब्रह्ममुहूर्त के निकट
हर प्रहर में अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक और मंत्रोच्चार की परंपरा है।
पारण (व्रत समापन):
16 फरवरी 2026, सूर्योदय के बाद उपयुक्त समय में।
शुभ योग : दुर्लभ संयोगों की रात्रि
ज्योतिषीय दृष्टि से महाशिवरात्रि 2026 विशेष मानी जा रही है। इस दिन बुधादित्य योग, लक्ष्मी-नारायण योग जैसे शुभ संयोग बनने की संभावना है। विद्वानों के अनुसार, ऐसे योग साधना, दान-पुण्य और शिवपूजन के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं। इन योगों में की गई आराधना से करियर, व्यापार, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।
चौघड़िया : पूजा के लिए शुभ समय
भक्तों की सुविधा के लिए पूजा और आरंभिक कर्मों हेतु शुभ चौघड़िया का भी ध्यान रखा जा रहा है।
दिन के शुभ चौघड़िया (15 फरवरी):
* लाभ
* अमृत
* शुभ
रात्रि के शुभ चौघड़िया:
संध्या के बाद शुभ और अमृत काल
मध्यरात्रि के आसपास लाभ काल
इन समयों में शिवलिंग अभिषेक, दीपदान, मंत्रजाप और ध्यान विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
पूजा-विधि और परंपराएँ
महाशिवरात्रि पर शिवपूजन की विधि सरल और भावप्रधान है।
* प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना।
* शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घृत, शहद और बेलपत्र से अभिषेक।
* “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जप।
* धूप-दीप, नैवेद्य अर्पण और आरती।
* रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और ध्यान।
मान्यता है कि शिव भाव के भूखे हैं—सच्चे मन से किया गया स्मरण ही सबसे बड़ा पूजन है।
व्रत और उपवास का संदेश
महाशिवरात्रि का व्रत केवल आहार-नियंत्रण नहीं, बल्कि विचार-शुद्धि का अभ्यास है। फलाहार या निराहार व्रत रखते हुए क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता से दूरी बनाए रखने की परंपरा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपवास आत्मसंयम सिखाता है और मानसिक संतुलन को मजबूत करता है।
देशभर में प्रमुख आयोजन
काशी, उज्जैन, हरिद्वार, सोमनाथ सहित देश के प्रमुख शिवधामों में विशेष सजावट, रुद्राभिषेक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने भी तैयारी पूरी कर ली है। मंदिर समितियाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-सारिणी और दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित कर रही हैं।
सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
महाशिवरात्रि का मूल संदेश समरसता और संतुलन है। शिव योगी भी हैं और गृहस्थ भी—यह सिखाते हैं कि जीवन में वैराग्य और कर्तव्य दोनों का संतुलन आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी शिव से जुड़ा है—बेलपत्र, जल और प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा इसका प्रतीक है।
महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
कामना है कि भगवान शिव की कृपा से जीवन में शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और सद्बुद्धि का वास हो। हर घर में सुख-समाधान, हर मन में विश्वास और हर कर्म में कल्याण की भावना प्रबल हो।
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
महाशिवरात्रि—एक रात्रि, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है; एक साधना, जो आत्मा को शिवत्व से जोड़ती है।
ॐ नमः शिवाय।



