आज 1 फरवरी 2026 भारत में दो अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व एक साथ मनाए जा रहे हैं, भारतीय तटरक्षक दिवस और संत रविदास जयंती। यह दिन न केवल हमारी समुद्री सीमाओं के संरक्षकों को सम्मानित करता है, बल्कि एक विराट भक्ति, समाज-सुधार और समता के संदेश को भी उद्घोषित करता है। भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना 1 फरवरी 1977 को हुई थी और इस दिन को हर वर्ष देश भर में उनके साहस, समर्पण और समुद्री सुरक्षा में योगदान के लिए मनाया जाता है। इस बल ने समंदर की लहरों में भारत की रक्षा, समुद्री सुरक्षा और मानव-कल्याण मिशनों में शानदार भूमिका निभाई है।
साथ ही संत रविदास जयंती भी इसी दिन माघ पूर्णिमा के अवसर पर मनायी जा रही है, जो 15वीं सदी के महान संत-कवि और समाज सुधारक संत रविदास की शिक्षाओं का उत्सव है। उनकी वाणी समानता, भक्ति और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित थी, जिसने लोगों के हृदय में भेदभाव-रहित और भाईचारे का संदेश भरा। आज उनका जन्म-दिवस हमें इंसानियत, दया और एकता की सीख देता है। ऐसे विशेष दिवस पर, हम उन वीरों और महापुरुषों को नमन करते हैं जिनकी प्रतिबद्धता और आदर्श आज भी हमारे जीवन को दिशा प्रदान करते हैं। आज का दिन हम सभी को सेवा, साहस और समता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। तो चलिए जानते हैं इन दोनों दोनों के बारे में विस्तार से….
भारतीय तटरक्षक दिवस- आइए जानते हैं इसका इतिहास, महत्व और थीम।
इंडियन कोस्ट गार्ड, भारतीय तटरक्षक बल, देश की समुद्री सुरक्षा और बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाता है. इसकी स्थापना 19 अगस्त 1978 को हुई थी, और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय तटों की सुरक्षा, समुद्र में एमर्जेंसी सेवाएं और प्रदूषण कंट्रोल करना है. यह बल समुद्र में अवैध गतिविधियों को रोकने, समुद्र तटों की सुरक्षा तय करने और नागरिकों की मदद करने के लिए कार्यरत है. हर साल 1 फरवरी को इंडियन कोस्ट गार्ड डे मनाकर इसके समर्पण और वीरता को सम्मानित किया जाता है, जानें इस दिन से जुडी कुछ खास बातें …
देशभर में हर वर्ष 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक दिवस (Indian Coast Guard Day) मनाया जाता है। इस खास मौके पर भारतीय तटरक्षक बल के जवानों को देश के समुद्री सीमाओं की रक्षा करने के लिए सम्मानित किया जाता है और विभिन्न कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन किया जाता है, जिनमें परेड, प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में भारतीय तटरक्षक दिवस के बारे में स्टूडेंट्स को पूरी जानकारी होनी चाहिए क्योंकि इससे जड़े प्रश्न कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। इसलिए आइए जानते हैं भारतीय तटरक्षक दिवस के बारे में विस्तार से ….
भारतीय तटरक्षक दिवस 2026 के मुख्य बिंदु
स्थापना दिवस : 1 फरवरी 1977
मुख्यालय : नई दिल्ली
प्राथमिक जिम्मेदारियाँ : अपतटीय सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, तटीय सुरक्षा, विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा
सहयोगी संस्थान : भारतीय नौसेना, सीमा शुल्क विभाग, पुलिस बल
वर्तमान स्थिति : विश्व का चौथा सबसे बड़ा तटरक्षक बल
2026 की थीम : आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।
भारतीय तटरक्षक दिवस
हर साल 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक दिवस (Indian Coast Guard Day in Hindi) मनाया जाता है। यह दिन, उन जवानों को समर्पित है जो समुद्री क्षेत्रों की रक्षा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। आपको बता दें कि भारतीय तट रक्षक, भारत का एक सशस्त्र बल है जो भारतीय समुद्री सीमा और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा करता है। हमारे देश की समुद्री सीमा लगभग 7500 किलोमीटर लंबी है जिसकी सुरक्षा भारतीय तटरक्षक बल के जवानों द्वारा ही की जाती है। वर्त्तमान में इस बल के पास लगभग 150 से अधिक जहाज और 100 से अधिक विमान हैं, जो उन्हें विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक क्षमता प्रदान करते हैं।
इंडियन कोस्ट गार्ड के क्षेत्रीय मुख्यालय
इंडियन कोस्ट गार्ड के पांच क्षेत्रीय मुख्यालय होते हैं, जो कई समुद्री क्षेत्रों में स्थित हैं. ये मुख्यालय मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता, गोवा और गांधीनगर में हैं. इन मुख्यालयों का कार्य समुद्री सुरक्षा, बचाव कार्य और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. ये क्षेत्रीय मुख्यालय देश के तटों और समुद्र में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं।
भारतीय तटरक्षक दिवस का इतिहास
हर साल 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक बल दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना के वर्षगाँठ को चिह्नित करता है। आपको बता दें कि 1 फरवरी, 1977 को भारत सरकार द्वारा भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य था समुद्री सीमा की रक्षा करना, समुद्री डकैती और तस्करी को रोकना, समुद्री आपदाओं में सहायता करना था। स्थापना के समय इस बल के पास केवल दो जहाज और पाँच गश्ती नौकाएँ थीं। इसी के साथ इस बल के पहले महानिदेशक एडमिरल वीए कामथ थे। जबकि मौजूदा समय में बल के पास लगभग 156 जहाज और 62 हवाई जहाज है। वहीं वर्तमान में राकेश पाल, पीटीएम, टीएम भारतीय तटरक्षक बल के 25 वें महानिदेशक हैं।
भारतीय तटरक्षक दिवस कब मनाया जाता है?
भारतीय तटरक्षक दिवस हर साल 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह दिन भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, कानूनों को लागू करने और बचाव अभियान चलाने में ICG कर्मियों के समर्पण और बहादुरी का सम्मान करता है। तटरक्षक बल तटीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा में उनके योगदान को मान्यता देने के लिए परेड, पुरस्कार समारोह और जागरूकता कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भारतीय तटरक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?
भारतीय तटरक्षक बल देश की समुद्री सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बल है जो समुद्री क्षेत्रों की रक्षा करने, समुद्री डकैती और तस्करी को रोकने और समुद्री आपदाओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे जवानों को उनके साहस और बलिदान के लिए सम्मानित करने के लिए भारतीय तटरक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन हम भारतीयों को एक ऐसा अवसर प्रदान करता है, जिसके माध्यम से हम समुद्री सुरक्षा करने वाले जवानों के समर्पण भाव को जान पाते हैं। ऐसे में इस दिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों में परेड और मार्च पास्ट, भाषण समारोह और सामाजिक सेवा कार्यक्रम आदि शामिल हैं।
इंडियन कोस्ट गार्ड के प्रमुख कर्तव्य
इंडियन कोस्ट गार्ड के प्रमुख कर्तव्यों में समुद्र तटों की सुरक्षा, समुद्री आपातकालीन बचाव कार्य और समुद्री प्रदूषण से निपटना शामिल है. इसके अलावा, यह मछली पकड़ने से संबंधित अवैध गतिविधियों को रोकता है और तस्करी के मामलों पर नजर रखता है. यह तटों पर होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय भी अहम बचाव कार्य करता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस का महत्व
भारतीय तटरक्षक दिवस का विशेष महत्व है क्योंकि यह भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के गठन और समर्पित सेवा का सम्मान करता है जो भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करता है, तटीय सुरक्षा सुनिश्चित करता है और खोज और बचाव कार्यों, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री कानूनों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दिन देश के जल की सुरक्षा के लिए ICG कर्मियों की बहादुरी और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
2026 में भारतीय तटरक्षक दिवस की थीम क्या है?
2026 में भारतीय तटरक्षक दिवस की थीम की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि घोषित होने वाली थीम समुद्री सुरक्षा, तटीय सुरक्षा और भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने और आपदा प्रबंधन में योगदान देने में भारतीय तटरक्षक की भूमिका को बढ़ाने पर केंद्रित होगा। थीम आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा के लिए संगठन की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारतीय तटरक्षक दिवस कैसे मनाया जाता है?
समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने के लिए 1 फरवरी 1977 को इंडियन कोस्ट गॉर्ड की स्थापना की गई थी। तब से लेकर हर साल 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित भारतीय तटरक्षक बल मुख्यालय में एक मुख्य समारोह का आयोजन होगा जिसमें भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। उन कार्यक्रमों का उद्देश्य है युवा छात्रों को इंडियन कोस्ट गॉर्ड (आईसीजी) की भूमिका के बारे में जानकारी प्रदान करना और उन्हें सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना। इसी के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को आईसीजी की क्षमता के बारे में जागरूक करना।
भारतीय तटरक्षक दिवस पर 10 तथ्य
* भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की स्थापना 18 अगस्त 1978 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।
* इसका काम समुद्री सुरक्षा, भारत के समुद्र तट की रक्षा करना और समुद्री कानूनों को लागू करना है।
* ICG समुद्र में खोज और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, समुद्री आपदाओं के दौरान लोगों की जान बचाता है।
* यह दिन बताता है कि भारतीय तटरक्षक बल भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों को रोकता है।
* तटरक्षक बल भारतीय नौसेना, सीमा शुल्क और समुद्री पुलिस जैसी अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है।
* यह पर्यावरण संरक्षण, समुद्री प्रदूषण से निपटने और तेल रिसाव की प्रतिक्रिया का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार है।
* बल की सेवा का सम्मान करने के लिए हर साल 1 फरवरी को भारतीय तटरक्षक दिवस मनाया जाता है।
* ICG निगरानी, गश्त और बचाव मिशन के लिए विभिन्न जहाजों, विमानों और हेलीकॉप्टरों का संचालन करता है।
* ICG दुनिया भर में सबसे बड़े तटरक्षक बलों में से एक है, जिसके पास 150 से अधिक जहाज और 70 विमान हैं।
* यह आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाओं का जवाब देने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक आवश्यक भूमिका निभाता है।
भारतीय तटरक्षक दिवस से जुड़े रोचक तथ्य
भारतीय तटरक्षक दिवस से जुड़े रोचक तथ्य इस प्रकार हैं-
* वर्तमान में भारतीय तटरक्षक बल के पास लगभग 150 से अधिक जहाज और 100 से विमान हैं।
* इन जहाजों और विमानों में विभिन्न प्रकार के उपकरण और हथियार हैं जो सेनाओं को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक क्षमता प्रदान करता है।
* आपको बता दें कि इंडियन कोस्ट गार्ड, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना, मत्स्य विभाग और राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर काम करता है।
* इंडियन कोस्ट गार्ड भारत के लगभग 7516.60 किलोमीटर के समुद्र तट की सुरक्षा करता है।
* एक इंडियन कोस्ट गार्ड 60 वर्ष की आयु तक सेवा कर सकता है।
देश के लोगों की सुरक्षा में कई सैनिक दिन-रात विभिन्न सीमाओं पर डटे हुए हैं। भारत की सुरक्षा का जिम्मा केवल थल सेना और वायुसेना के पास ही नहीं बल्कि भारतीय तटरक्षक बल के पास भी होती है। भारतीय तटरक्षक बल का कार्य अन्य सीमाओं पर तैनात जवानों से भिन्न होता है। भारतीय तटरक्षक बल के सदस्य भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, समुद्री कानूनों के प्रवर्तन और समुद्री आपदाओं के दौरान खोज और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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संत रविदास जयंती 2026: तिथि, इतिहास और महत्व
भारत की धरती पर कई महान गुरु हुए। जिनमें से एक थे संत रविदास। जिनके वचनों ने दुनियाभर में परचम लहराया। इनकी वाणी में इतनी ताकत थी कि जो भी उन्हें सुनता था उनका मुरीद हो जाता था। गुरु रविदास जी ने अपने वचनों और दोहों से भक्ति की ऐसी अलौकिक ज्योति जलाई जो आज भी सभी को रोशन कर रही है। इस महान संत को दुनिया आज भी याद करती हैं और उनके सम्मान में हर साल रविदास जयंती का पर्व मनाती हैं। चलिए जानते हैं इस साल रविदास जयंती कब है और इसका महत्व क्या है।
आज 01 फरवरी, रविवार को देश भर में संत रविदास जयंती मनाई जाएगी। मध्यकालीन भारतीय संत परंपरा में संत रविदास का विशिष्ट स्थान है. संत रविदास को संत रैदास और भगत रविदास के नाम से भी संबोधित किया जाता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, गुरु रविदास का जन्म वर्ष 1398 में माघ महीने की पूर्णिमा के दिन हुआ था। हालांकि उनके जन्म को लेकर कई विद्वानों का मत है कि 1482 से 1527 ईस्वी के बीच उनका जन्म हुआ था। कहा जाता है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ, उस दिन रविवार था, इसलिए उनका नाम रविदास पड़ गया. गुरु रविदास जी का जन्म चर्मकार कुल में हुआ था. यूं तो हर वर्ग की निष्ठा गुरु रविदास जी के साथ जुड़ी हुई है, लेकिन इनके अनुयायियों में चर्मकार एवं सिख समुदाय की संख्या ज्यादा होती है।
यहाँ संत रविदास जयंती 2026 की तिथि एवं शुभ मुहूर्त का विस्तृत विवरण है
तिथि : संत रविदास जयंती — रविवार, 1 फ़रवरी 2026 को मनाई जाएगी। जो कि माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर पड़ती है।
पूर्णिमा तिथि विवरण :
पूर्णिमा तिथि शुरू: 1 फ़रवरी 2026, सुबह 05:52 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 फ़रवरी 2026, सुबह 03:38 बजे
चूँकि पूर्णिमा तिथि 1 तारीख को सुबह से शुरू होती है, इस वर्ष संत रविदास जयंती 1 फ़रवरी 2026 को ही मान्य होगी।
शुभ मुहूर्त : यह दिन पंचांग के अनुसार बहुत शुभ है क्योंकि कई शुभ योग बन रहे हैं।
मुख्य बातें:
पूर्णिमा तिथि का शुभ समय – सुबह 5:52 बजे से
पुष्य नक्षत्र – दिन भर पुष्य नक्षत्र रहेगा, जो पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
योग – प्रीति योग, आयुष्मान योग, श्रीवत्स, वज्र व रवि-पुष्य जैसे शुभ योग दिनभर बनेंगे, जो पूजा, दान, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
राहुकाल/काला समय – पंचांग के अनुसार राहुकाल आदि समय पूजा-कार्य से बचना चाहिए (स्थानीय पंचांग के अनुसार समय अलग-अलग हो सकता है)।
पूजन-अनुष्ठान के सुझाव
* भगवान गुरु रविदास का आरती और भजन-कीर्तन करें।
* पवित्र नदियों में स्नान (जहाँ संभव हो) या घर पर स्नान के बाद पूजा करें।
* गरीबों को दान-पुण्य देना शुभ फल देता है।
* संत रविदास के दोहे एवं शिक्षा का स्मरण करें।
संत रविदास का जीवन परिचय: संत रविदास का जन्म 1450 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम संतोष दास और माता का नाम कलसा देवी था। वे एक चर्मकार परिवार से थे और जूते बनाने का कार्य करते थे। बचपन से ही उनमें आध्यात्मिकता की झलक थी, जिसके कारण वे समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक बने।
शिक्षा और समाज सुधार: संत रविदास ने समाज में व्याप्त जाति-पांति और भेदभाव का विरोध किया। उनका मानना था कि कोई भी व्यक्ति जन्म से नीच या उच्च नहीं होता, बल्कि उसके कर्म उसे महान या तुच्छ बनाते हैं। उनका प्रसिद्ध दोहा है:
“रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच। नकर कूं नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच।।”
उन्होंने अपने दोहों और भजनों के माध्यम से मानवता, समानता और प्रेम का संदेश दिया। उनकी रचनाओं में राम, कृष्ण, करीम, रघुनाथ, गोविंद, राजा रामचंद्र आदि नामों से हरि सुमिरन मिलता है, पर मूल रूप से वे उस निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे, जो सभी प्राणियों में समान रूप से व्याप्त है।
रविदास जयंती का महत्व: रविदास जयंती के दिन उनके अनुयायी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और संत रविदास के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक घटनाओं को याद करते हैं। उनके जन्म स्थान पर लाखों की संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं और भव्य कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिसमें उनके दोहे गाए जाते हैं और भजन-कीर्तन होते हैं।
उत्सव की तैयारी: रविदास जयंती के अवसर पर देशभर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। लोग संत रविदास के मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, नगर कीर्तन निकालते हैं और उनके दोहों का पाठ करते हैं। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन और सेवा कार्य भी किए जाते हैं।
संत रविदास की शिक्षाएं आज भी समाज में प्रासंगिक हैं और हमें समानता, प्रेम और भक्ति का संदेश देती हैं। रविदास जयंती का पर्व उनके आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का अवसर प्रदान करता है।
इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।”



