दुर्ग। 02 जनवरी, 2026, (सीजी संदेश) : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली का एकीकरण एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन आज राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पुनर्वास तथा उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा और कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब द्वारा शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में किया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महान परम्परा का प्रतिनिधित्व करती है। यह नीति केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन जीने की समग्र और समर्थ शैली प्रस्तुत करती है। भारतीय ज्ञान परम्परा वेद, उपनिषद, महाभारत, आयुर्वेद, गणित, योग, दर्शन, पुराण, ज्योतिष और खगोल शास्त्र जैसी विविध विधाओं में निहित है। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा का मूल आधार अध्यात्म, नैतिकता और व्यवहारिकता है। गुरुकुल प्रणाली में शिक्षा केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन और समाज सेवा की भावना को जागृत करना भी था। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युग में पाश्चात्य प्रभाव के कारण भारतीय ज्ञान परम्परा का महत्व कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन अब इसके संरक्षण और संवर्धन की पुनः आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली के पुनरुत्थान पर विशेष बल दिया गया है। यह सेमिनार भी उसी प्रयास का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। जब तक हम इसे अपने जीवन और शिक्षा प्रणाली में आत्मसात नहीं करेंगे, तब तक इसका संरक्षण संभव नहीं है। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों के विचारों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को और अधिक समृद्ध बनाने में सहयोग मिलेगा। यह नीति भारत की दिशा और दशा तय करने वाली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के 2047 विकसित भारत के विजन को साकार करने में यह नीति महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि यह नीति हम सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है, ताकि इसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने वाली पीढ़ी को आधुनिकता के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परम्परा, इतिहास और संस्कृति से जोड़ना है। इसके लिए विभाग लगातार इस दिशा में प्रयासरत है और निश्चित रूप से भविष्य में भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में यह नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का गहन अध्ययन कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है और यह तभी संभव है, जब सभी विद्वानों मिलकर इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करें।
इस अवसर पर गुरू घासीदास केन्द्रीय वि.वि. बिलासपुर के कुलपति प्रो.आलोक चक्रवाल, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग संतोष कुमार देवांगन, शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर प्रो. ए.डी.एन.वाजपेई, पंडित सुंदर लाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर प्रो. विरेन्द्र कुमार सारस्वत, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई डॉ.अरूण अरोरा, क्षेत्रीय अपर संचालक सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नोडल, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अधिकारी व बड़ी संख्या में सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे।



